15 हजार हेक्टेयर में दलहन-तिलहन
भास्कर न्यूज - बालोद
खरीफ में विलंब होने के बाद किसान अब रबी की तैयारी में लग गए हैं। हालांकि रबी फसल की प्रक्रिया गड़बड़ा गई है। इस बात को कृषि विभाग भी स्वीकार कर रहा है।
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक रबी की बोनी आधी हुई है। ब्लाक में लगभग १५ हजार हेक्टेयर का लक्ष्य है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि मार्च तक बोनी का समय है। सिंचाई विभाग द्वारा जिले में ९ हजार ४०० हेक्टेयर रकबा में पानी दिया जा रहा है। थरहा लगाने वाले किसान कुछ ही दिनों में रोपाई कार्य शुरू करेंगे। कुछ जगहों में रोपा लगाया जा रहा है। लाईचोपी पद्धति को भी किसान अपना रहे है। नहर पास किसानों को ही सिंचाई की सुविधा मिल पाती है। इस सुविधा से वंचित किसान दलहन-तिलहन की ओर ध्यान दे रहे हैं। वैसे तो अंचल के किसान दलहन तिलहन की बजाए धान की फसल लेते रहे हैं। इस बार सिंचाई की भी सुविधा मिली है। किसानों का कहना है कि रबी का धान सरकार नहीं लेती है। मंडी में ही विक्रय किया जाता है। ऐसे में सही दाम नहीं मिल पाता। धान में दलहन-तिलहन की अपेक्षा अधिक रोग लगते हंै। अक्टूबर में बारिश होने से क्षेत्र के अधिकतर किसानों को नुकसान हुआ है। यही वजह है कि इस बार धान कम बोआ जाएगा।
किसान हेमंत साहू, लोकेन्द्र हिरवानी ने बताया कि वे कुछ सालों से सरसों व लाखड़ी ले रहे हैं। क्योंकि इसमें लागत कम आने के अलावा सिंचाई की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है। किसान युवराज साहू, बिहारी सार्वा ने बताया कि इस बार चने की फसल लिए है।
सरसों की फसल।
रबी फसल
धान की कीमत नहीं मिलने के कारण किसानों का रुझान अन्य फसल की ओर