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लौह खदान बंद, बेरोजगार हो गए 109 ठेका श्रमिक

8 वर्ष पहले
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खदान के दो बड़े ठेका समाप्त। कई साल से काम कर रहें ठेका श्रमिक।
भास्कर न्यूज - दल्लीराजहरा
लौह अयस्क खदानों में चल रहे दो बड़े ठेका कार्य समाप्त हो जाने से 109 ठेका श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। जिससे एक बार फिर बीएसपी प्रबंधन व बेरोजगार हो चुके ठेका श्रमिकों के बीच टकराव की स्थिति निर्मित होने की आशंका बढ़ती जा रही है।
सीटू के सचिव प्रकाश क्षत्रिय ने कहा कि दल्ली माइंस के ओवर बर्डन हटाने का काम 12 जनवरी को बंद हो गया है जिसमें 55 श्रमिक कार्यरत थे। इसी तरह मयूरपानी खदान का काम 19 जनवरी को बंद हो जाने से 97 ठेका श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। ये सभी श्रमिक विगत कई साल से विभिन्न ठेका कार्यों में कार्य करते हुए खदानों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते आए हैं। लेकिन खदान व बीएसपी प्रबंधन को इनके प्रति कोई सहानुभूति नहीं है। जबकि ये ठेका श्रमिक कई बार आंदोलन कर स्थायी रूप से काम देने की मांग कर चुके हैं। लेकिन इन्हें हर बार केवल आश्वासनों का झुनझुना थमा दिया जाता है। खदानों में उत्खनन व उत्पादन सतत चलने वाली प्रक्रिया एवं कंपनी की जरूरत होने के बावजूद टुकड़ों में कम अवधि का ठेका दिया जाता है। जिससे कंपनी एवं श्रमिकों दोनों का नुकसान होता है इसके अलावा हर बार आईआरडी की समस्या खड़ी होती है।
प्रबंधन के अधिकारियों को अच्छी तरह से मालूम है कि किसी भी बड़े ठेके की टेंडर प्रक्रिया में कम से कम 3 से 6 माह का समय लगता है इस जानकारी के बावजूद कार्य की निरंतरता को बनाए रखने के लिए समय पर कार्यवाही न किया जाना कंपनी व श्रमिक हितों की उपेक्षा है। सामाजिक उत्तरदायित्व की जिम्मेदारी का निर्वहन करने का दावा करने वाले प्रबंधन की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसे उत्पादन कार्य में लगे उन श्रमिकों की तनिक भी चिंता नहीं है जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी खदानों में खपा दी और उनका परिवार बच्चे व उनकी शिक्षा और चिकित्सा इसी खदान की मजदूरी पर निर्भर है। आज ये श्रमिक उम्र के इस दौर में है जहां से ये किसी अन्य जगह जाकर काम भी नहीं कर सकते हैं।
सीटू का स्पष्ट मानना है कि इन श्रमिकों को टुकड़ों में रोजगार तो मिला लेकिन इनके भविष्य व स्थायित्व के मामले में प्रबंधन व तथाकथित रहनुमाओं ने इन्हें बार-बार धोखा दिया है। बेशक ये श्रमिक खदानों में विभागीकरण के हकदार है यदि किसी कारणवश ऐसा नहीं हो पाया तो इनके स्थायी रोजगार की व्यवस्था तो होनी ही चाहिए। इस समस्या के निराकरण के लिए एक पारदर्शी ठेका श्रमिक नीति एवं बेरोजगार हुए उक्त ठेका श्रमिकों को तत्काल खदान के अन्य कार्यों में समाहित करने की महती आवश्यकता है जिस पर प्रबंधन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।



समस्या - बीएसपी प्रबंधन व ठेका श्रमिकों के बीच टकराव की आशंका

मयूरपानी लौह खदान में 19 जनवरी के काम बंद हो जाने से यहां कार्यरत 97 ठेका श्रमिक बेकार हो गए।