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खुशबू को सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत हर माह मिलेंगे 200 रुपए

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज. बालोद
ग्राम पसौद में कक्षा छठवीं की छात्रा खुशबू निर्मलकर दोनों पैर से विकलांग है। शासन से उसे सिर्फ एक व्हील चेयर मिला है। रंगोली प्रतियोगिता से हुनर दिखा चुकी खुशबू के अलग ही सपने है। उनकी जीवन की कहानी को दैनिक भास्कर ने विगत 28 दिसंबर के अंक में प्रकाशित किया। खबर प्रकाशन के बाद पंचायत प्रशासन ने खुशबू को आर्थिक सहायता देने कदम उठाया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में उनका नाम जोड़ दिया गया है। अब उसे प्रतिमाह 200 रुपए पेंशन मिलेगा। सचिव अश्वनी कुमार साहू ने बताया कि खुशबू को जल्द ही शासन की अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने प्रयास किया जाएगा। उनकी प्रतिभा को निखारने का काम होगा। खुशबू की पढ़ाई लिखाई में भी मदद की जाएगी।
रंगोली के अलावा नाटक, कविता, गीत, भाषण की सभी दाद देते हैं। इस गणतंत्र दिवस में भी वह भाषण व कविता की प्रस्तुति देगी। खुशबू के पिता ईश्वरी लाल निर्मलकर ने कहा कि दैनिक भास्कर ने खबर प्रकाशित कर पंचायत प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया। उन्होंने भास्कर को भी धन्यवाद दिया।
झलकता है आत्मविश्वास : खुशबू के शिक्षिका सीना नायर व किरण सिंह ने बताया कि छठवीं की छात्रा खुशबू की आंखों से आत्मविश्वास झलकता है। वह प्रतिभाशाली स्टूडेंट है। पढ़ाई में वह अव्वल है। पहली से पांचवीं कक्षा तक वह क्लास में टॉपर रही है। उन्होंने बताया कि खुशबू ने कक्षा तीसरी में ब्लाक स्तरीय रंगोली स्पर्धा में हिस्सा लेकर प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
इलाज कराने में पैसा आ रहा आड़े : खुशबू के पिता ने बताया कि उनके इलाज के लिए उन्होंने तीन साल तक हास्पिटल का चक्कर कांटे है। ईश्वरी लाल ने बताया कि वे दूसरे की दुकान पर रोजी-मजदूरी करते है और खुशबू की मां भी खेतों में काम करने जाती है। पैसों की कमी के कारण बड़े शहरों के डॉक्टरों से इलाज करा पाने में वे असमर्थ है।



व्हील चेयर पर स्कूल जाती खुशबू।

दौड़ते देखने की है तमन्ना

पिता ईश्वरी लाल व माता गिरजा बाई दोनों का सपना है कि वे अपनी बेटी को पैरों पर खड़े चलते, दौड़ते, भागते देखे। जन्म से घुटनों की हड्डी कमजोर होने से खुशबू के पैर मुड़ गए हैं। इलाज कराने का प्रयास भी करते रहे। अभी तक सफलता नहीं मिली। शारीरिक रूप से कमजोर खुशबू के इरादे मजबूत है, जो बड़ी होकर निशक्तों की सेवा करनी चाहती है। वह निशक्तों के लिए आश्रम खोलकर पढ़ाना चाहती है।

२८ दिसंबर को प्रकाशित खबर।