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द्वेष नहीं, प्रेम करना सिखाता है धर्म : वीरेंद्र द्विवेदी
बेरला - नगर में श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में राष्ट्रीय मनीष आचार्य वीरेंद्र द्विवेदी ने कहा कि धर्म की संरचना मानव मात्र को मर्यादित रहकर शिष्ट और सुव्यवस्थित आचरण से संपूर्ण मनुष्यों का कल्याण के लिए की गयी। हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध सभी धर्म मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए है। कोई भी धर्म चोरी, निंदा, हत्या, लुटपाट करना नहीं सिखाता। धर्म आपस में द्वेष नहीं प्रेम करना सिखाता है। कुछ लोग धर्म की दुहाई देकर समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। इन घोर स्वार्थी लोगों से भारतीय जन मानस को सावधान रहने की जरूरत है। उन्होनें गज माह के विषय में भी संदेश दिया कि जैसे कमल के फूल का आश्रम लेकर गजेन्द्र डूवने से बच गया।