जिले में 13 फीसदी ही सिंचाई रकबा
जिले में पर्याप्त जीवनदायिनी नदी होने के बावजूद 28 हजार हेक्टेयर में ही हो रही सिंचाई। राज्य में सबसे कम है सिंचाई रकबा
महेश दुबे - बेमेतरा
सरकारी सिंचाई सुविधा की कमी के चलते जिले में इरीगेशन विभाग के पास 300 किलोमीटर मुख्य नहर नाली व 153 छोटे-बड़े सिंचाई योजनाओं से 28 हजार हैक्टेयर रकबे में ही सिंचाई हो रही है। सिंचाई विभाग की माने तो सरकार की तरफ से सिंचाई सुविधाएं और बढ़ाने के लिए समुचित राशि नहीं मिलने के कारण 30 से 40 साल पहले बने 50 से अधिक बांध आज की स्थिति में बेकार हो गए हैं। इतने सालों में सिंचाई क्षमता विकसित नहीं होने के कारण 87 फीसदी किसान बारिश के भरोसे खेती करते हैं।
साधनों से युक्त किसान ही अपने खेतों की सिंचाई करने में सक्षम हैं। ऐसे किसानों की संख्या काफी कम है। राज्य बनने के बाद भी सिंचाई के साधनों को विस्तारित करने की योजना यहां के जनप्रतिनिधियों ने नहीं बनाई है। बीते चालीस सालों में नहरों की देखरेख भी नहीं की गई है। जिले के किसान कृत्रिम हाई तकनीक का फायदा नहीं ले पा रहे हैं। 14 सालों में जिले में केवल एनीकट ही बनाए गए हैं।
लिफ्ट इरीगेशन योजना के विस्तार की जरूरत
वर्तमान एनीकट के अप स्ट्रीम में दाईं व बांई तट पर लिफ्ट इरीगेशन योजना के विस्तार से जिले को 60 फीसदी रकबे के लिए सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराया जा सकता है। किंतु शासन के पास विस्तार की योजना नहीं है। यही नहीं 30 से 35 साल पहले बने बांध की खराब स्थिति को सुधारने के लिए संबंधित विभाग के पास पैसा नहीं है। जिसकी वजह से 50 से अधिक डेम बेकार हो चुके हैं।
जनप्रतिनिधि रहे उदासीन
जिले में राज्य की तुलना में सबसे कम सिंचाई क्षेत्र होने के बावजूद नए बांध व नहरों के विस्तारीकरण के लिए किसी भी ने प्रयास नहीं किया। 22 एनीकट जरूर बनाएं गए हैं पर इनसे सिंचाई नहीं होती। नए बांध बनाने, पुराने बांधों को उपयोगी बनाने व नहरों की लाइनिंग, रि-माडलिंग करने की जरूरत है । यही वजह है कि जिले की सिंचिंत रकबा केवल 13 फीसदी ही है।
22 एनीकट का हुआ निर्माण
जिले में राज्य बनने के बाद 22 नए एनीकट का निर्माण खारुन, शिवनाथ, हाफ नदी, संकरी नदी , टोडू सुरही में किया गया है। राज्य सरकार ने एनीकट का निर्माण भूमिगत जल स्रोतों में वृद्धि करने के नाम पर किया गया है। सभी 22 एनीकट से सिंचाई नहीं होती। एनीकट के ऊपर में खेती की जाती है।
300 किमी नहर नाली, 153 छोटी-बड़ी सिंचाई योजनाएं
बेमेतरा के मुठपार जलाशय में जल भरा है पर सिंचाई नहीं होती।
छत्तीसगढ़ बनने के बाद जिले में केवल एक एनीकट ही बनाया गया
खेती-किसानी - कृषि पर आधारित उद्योग की हो रही मांग पर 87 फीसदी क्षेत्र है असिंचित
जिले में 28381 निजी सिंचाई पंप
बेमेतरा जिले में वर्तमान में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 28381 पावर पंप हैं। संभागीय विद्युत मंडल के अनुसार 26409 निजी पावर पंप चल रहे हैं तथा 1972 नए सिंचाई पंप के आवेदन लंबित हैं।
दयाल दास बघेल
अवधेश चंदेल
लाभचंद बाफना
30-35 साल पुराने 50 से अधिक डेम रखरखाव के अभाव में हुए बेकार