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यज्ञ की आहुति के समान हैं सत्कर्म : विद्यासागर

7 वर्ष पहले
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बेमेतरा - श्रीराम चरित मानस महायज्ञ की पूर्णाहुति पर अयोध्याधाम से आए श्रीश्री 1008 रामानुजाचार्य विद्यासागर महाराज ने धर्मसभा में उपदेश देते हुए कहा कि जीवन के समस्त सत्कर्म यज्ञ की आहुति के समान होते हैं। मानव अपने कर्म को सुधार ले तो स्वत: ही धर्म सुंदर हो जाता है। जब धर्म सुंदर बनता है तो ज्ञान बढ़ता है। जिससे भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। फिर भी आत्मा को सुख मिलता है और परमात्मा का मिलन हो जाता है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य को परिभाषित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अर्थात छत्तीसगढ़ का आंकड़ा कहा जाता है। जिसे समझना मुश्किल है। जिस प्रकार विवाह संस्कार में 36 गुण मिलने पर दांपत्य बंधन को पवित्र व सर्वोत्तम माना जाता है। छत्तीसगढ़ में 36 गुण विद्यमान हैं। तभी को भगवान राम का ननिहाल व भगवान कृष्ण के ससुराल का गौरव इस क्षेत्र को मिला है। गुरुदेव रामजानकी महात्यागी ने भी राम नाम जाप व गुरुमंत्र का जाप करने का संदेश दिया। भक्तों की श्रद्धा को बनाए रखने व मातृ शक्ति को शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना यज्ञ नारायण ने भगवान से की थी।