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कवर्धा से गन्ना नहीं आया तो बंद हो सकता है कारखाना

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बालोद
जिले का शक्कर कारखाना करकाभाट 23 दिसंबर से शुरू तो हो गया है लेकिन उसे सीजन भर चलाने के लिए पर्याप्त गन्ने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। पिछले साल की तरह कवर्धा से गन्ना लाकर कारखाना चलाना है। लेकिन शासन से परिवहन खर्च के लिए अब तक छह करोड़ नहीं मिलने से मामला अटक गया है।
एक महीने से कारखाना जिले के गन्ने से चल रहा है। गन्ने की आपूर्ति सही ढंग से नहीं होने से इस पेराई सीजन में संचालन व्यवस्था गड़बड़ा रही है। वहीं यहां के कर्मचारी कम वेतन के कारण काम करने से पीछे हट रहे हैं। अगर यहीं स्थिति रही तो कारखाने की आर्थिक व्यवस्था एक बार फिर गड़बड़ा जाएगी। प्रशासन कारखाना शुरू करने के पहले गन्ने को लेकर जोर तो देता है लेकिन कारखाना चालू होने के बाद चुप्पी साध लेता है। कवर्धा के भरोसे ही पिछले सीजन में दो महीने से ज्यादा दिन तक कारखाना चला था। इस साल भी कवर्धा से गन्ने से उम्मीद है। लेकिन परिवहन राशि के स्वीकृत न होने से वहां से गन्ना आने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। शासन गन्ना परिवहन को लेकर अब तक गंभीर नहीं हो पाया है।
बताया जाता है कि शुरुआत में ही कुछ ही क्विंटल गन्ने की पेराई हो पाती थी। कारखाना प्रबंधन ने इस बार शासन से 25 करोड़ अनुदान राशि की मांग की थी। जिसमें परिवहन के लिए छह करोड़ भी शामिल है। लेकिन इस राशि के स्वीकृत नहीं होने से कवर्धा से गन्ना नहीं आ पा रहा है। इस वजह से सही तरीके से पेराई नहीं हो पा रही है। कारखाना में इस सीजन की विधिवत रूप से 23 दिसंबर से गन्ने की पेराई शुरू हो गई थी।
हर सीजन में होती है गन्ने की कमी, स्थाई राहत जरूरी
ऐसा नहीं है कि इसी सीजन में गन्ने की कमी महसूस हो रही है। हर सीजन में गन्ने की कमी होती है लेकिन कवर्धा से गन्ना आने की वजह से कारखाना कम से कम दो महीने तक चल ही जाता है। लेकिन वर्तमान में कवर्धा से गन्ना नहीं आ रहा है तो इस सीजन में पेराई कार्य प्रभावित हो रही है। बालोद ब्लॉक में 53 ग्राम पंचायतों के 93 गांव होने के बाद भी हर साल कारखाने में गन्ने की कमी होती है। जिले के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत कारखाने में पेराई के लिए 40 हजार टन गन्ना कारखाना के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में इन्हीं गन्नों से पेराई चल रही है। वहीं कवर्धा से 60 हजार टन आना है। जो अभी तक नहीं आया है। इसी तरह बेमेतरा, साजा, बेरला से 50 हजार क्विंटल गन्ना लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कारखाना होने के बाद भी गन्ने के मामले में जिला अभी तक आत्म निर्भर नहीं हो पाया है। शासन किसानों को गन्ना लगाने के लिए कई योजनाएं संचालित करती है। इसके बाद भी गन्ना रकबा का नहीं बढ़ पाना सोचनीय है। हर सीजन में कवर्धा व अन्य क्षेत्रों के गन्ने से हर साल पेराई होती है। ज्यादा दिन पेराई हो, इसके लिए ज्यादा व नियमित गन्ने की जरूरत पड़ती है। लेकिन गन्ना के अभाव की वजह से कारखाना की पेराई क्षमता घटती जा रही है। अगर जिले में कारखाने के लिए पर्याप्त गन्ना मिल जाए तो पेराई की अवधि बढ़ सकती है और साथ-साथ शक्कर उत्पादन भी बढ़ेगा।



नहीं मिली राशि

॥शासन से अभी परिवहन हेतु राशि नहीं मिल पाई है। प्रोसिडिंग में है। हमें उम्मीद है, कि राशि हमें जरूर मिल जाएगी। उसके बाद कारखाना लंबे समय तक चल पाएगा।ञ्जञ्ज

एके चंदेल, जीएम शुगर मिल करकाभाट

एक दिन में 50 ट्रक

गन्ने की खपत

कारखाने में प्रतिदिन 50 ट्रक गन्ने की खपत होती है। कारखाना के कर्मचारी हर समय काम करने के लिए तैयार है लेकिन गन्ना की कमी के कारण कारखाना नियमित चालू नहीं रहता। कवर्धा से गन्ना लाना महंगा पड़ता है लेकिन मजबूरी होती है। खरीफ सीजन में कृषि विभाग ने जिले में 1200 हेक्टेयर में गन्ना लगाने का लक्ष्य रखा था। जिसमें बालोद ब्लॉक से 200 ,गुरुर 200, गुंडरदेही 300, डौंडी 200, डौंडीलोहारा ब्लॉक में 300 हेक्टेयर निर्धारित किया गया था। पिछले साल लगे गन्ने को बीज के रूप में इस्तेमाल किया गया है। इससे दो हजार हेक्टेयर में लगे गन्ने से कुछ ही गन्ना कारखाना में पेराई के लिए पहुंच रही है। सीजन 2010-11 में गन्ने का रकबा 373 हेक्टेयर था। जो 2011-12 में बढ़कर 1130 हेक्टेयर हो गया। जिले के इतने बड़े क्षेत्र में भी यदि गन्ने की बोनी हो तो शक्कर कारखाना के लिए यह काफी मददगार होता। इस सत्र में कुछ ही गांवों में गन्ने की फसल ली गई है। इसमें भी रकबा काफी कम व छिटपुट है। कोई आधा एकड़ में गन्ना लगाया है तो कोई एक एकड़ में,े ब्लॉक में रकबा बहुत कम है।

स्थानीय किसानों के भरोसे ही शक्कर कारखाने को मिल रहा अपर्याप्त गन्ना।

ञ्चकवर्धा से 60 हजार टन गन्ने की जरूरत

ञ्चगन्ने की आपूर्ति सही ढंग से नहीं हो रही

संकट - कारखाना प्रबंधन ने परिवहन के लिए सरकार से मांगा 6 करोड़