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- चाय, नाश्ता बेचकर दालभात केंद्र चला रहे संचालक
चाय, नाश्ता बेचकर दालभात केंद्र चला रहे संचालक
भास्कर न्यूज - बालोद
शासन की अन्नपूर्णा दाल-भात योजना अब नाम की रह गई है। योजना के संचालक भी अब इससे विमुख हो रहे हैं। प्रमुख वजह है महंगाई। शासन के निर्देश पर 5 रुपए में संचालक लोगों को दाल-भात तो उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन इससे उनकी कोई कमाई ((आय)) नहीं होती।
आय का स्त्रोत बढ़ाने के लिए संचालकों को चाय, नाश्ता, समोसा का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं 5 रुपए में दाल-भात तो अलग से 5 रुपए के बदले थोड़ी सी सब्जी दी जा रही है। जिले में 6 जगह एक-एक केंद्र संचालित है। सभी स्थानों में केंद्र की स्थिति डावाडोल है। संचालक नान से कम मात्रा में चांवल सप्लाई होने की बात कहते है।
वहीं दाल, सब्जी के लिए अलग से राशि नहीं मिलने के कारण योजना में गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा जाता। केंद्रों में बरबट्टी, आलू, पत्ता गोभी, चने, भांटा, मूली की सब्जी ज्यादा पकाई जाती है। जो सस्ती व सुलभ होती है।
टूट-फूट गए हैं फर्नीचर
बालोद केंद्र के संचालक यशवंत यादव ने बताया कि केंद्रों में प्रतिमाह 20 क्विंटल तक चांवल की खपत है, लेकिन शासन से 12 से 15 सितंबर तक ही चावल की खपत के हिसाब से सप्लाई होती है, जबकि केंद्र में दाल-भात पेट भर देने का नियम है। एक बार परोसने के बाद दोबारा चांवल दिया जाता है, वहीं केंद्रों में 10 साल से फर्नीचर की सप्लाई नहीं हुई। जब केंद्र खोले गए तो ग्राहकों को बैठकर भोजन करने के लिए टेबल, बेंच की व्यवस्था प्रशासन से ही की गई थी, लेकिन दोबारा सप्लाई नहीं होने से ग्राहकों को टूटे-फूटे फर्नीचर में बैठाया जाता है। संचालकों ने बताया कि 10 रुपए में दाल-भात, सब्जी बेचकर क्या कमाई करें।
केंद्र तो कब का बंद हो गया होता, यदि केंद्र में होटल न चलाते ग्राहक जीवन लाल ((कुरदी)), मिथलेश साहू ने बताया कि दोपहर में भूख मिटाने के लिए बालोद का केंद्र उपर्युक्त है, क्योंकि यहां निजी भोजनालय की अपेक्षा सिर्फ 10 रुपए में भोजन मिल जाता है।
भोजनालय में 60 से 70 रुपए थाली में भोजन मिलता है। बस केंद्र में कुछ कमी है, यह रोज नहीं खुलती। सब्जी कम दी जाती है। एक्स्ट्रा सब्जी का अलग से शुल्क देना पड़ता है। लोग भूख मिटाने दाल-भात के अलावा समोसा व चाय भी लेते है। सच तो यही है कि अन्नपूर्णा दाल-भात केंद्र, दाल-भात के भरोसे कम, बल्कि चाय, नाश्ते के भरोसे चल रहा है। बालोद का केंद्र पिछले तीन दिन से बंद है। संचालक ने कुछ जरुरी कार्य के कारण केंद्र को बंद कर दिया है। इससे लोग भूख, मिटाने अन्य निजी होटल व भोजनालय में जा रहे हैं।
जिले में लडख़ड़ा गई है अन्नपूर्णा दाल-भात योजना। जिले के छह स्थानों में एक-एक केंद्र संचालित। चांवल व फर्नीचर की सप्लाई समय पर नहीं होती। बंद होने की कगार पर केंद्र। सिर्फ चांवल के भरोसे नहीं, बल्कि चाय, नाश्ता होटल खोलकर केंद्र चला रहे संचालक।
पांच रुपए में नहीं हो रहा फायदा, चाय नाश्ता से चला रहे जीविका।
जिले में और चाहिए दालभात केंद्र
बालोद शहर में कचहरी के पास चिखलाकसा, डौंडी, डौंडीलोहारा, गुरुर में एकएक- केंद्र संचालित है, जबकि एक केंद्र उस स्थानों की आबादी के हिसाब से कम है। कम से कम दो केंद्र होने चाहिए। वहीं गुंडरदेही, देवरीबंगला, अर्जुंदा, पुरुर जैसे बड़े क्षेत्र में एक भी केंद्र नहीं है।