पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • चने की फसल पर इल्ली का प्रकोप, किसान चिंतित

चने की फसल पर इल्ली का प्रकोप, किसान चिंतित

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर न्यूज - बालोद
क्षेत्र में खरीफ व रबी फसल के अलावा दलहन-तिलहन की फसल में चना का उत्पादन अच्छा होता है। घरेलू खर्च, खाने के उपयोग, बेचने व अधिक लाभ के लिए किसान चना लगाते हैं। खरीफ फसल में धान की कटाई, मिंजाई व बेचने के बाद किसान चने की फसल लगाए है। क्षेत्र के किसान पिछले साल नवंबर में चना लगाए हैं। जो खेतों में हरे-भरे पौधे दिखाई दे रहे हैं। किसानों ने बताया कि पिछले दिनों मौसम खराब होने व लगातार बदली छाए रहने के कारण चना में इल्ली व अन्य कीटों का प्रकोप दिखाई दे रहा है।
दवाई का करें छिड़काव : पसौद के किसान ईश्वरी साहू, तेजूराम साहू व लोचन साहू ने बताया कि दिसंबर व जनवरी के प्रथम सप्ताह में मौसम ठीक नहीं था। पौधे में धूप व ठंड नहीं मिलने के कारण इल्ली व कीट दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इल्ली से चना को बचाने के लिए फसल में कीटनाशक दवाई का छिड़काव किया जा रहा है।



मौसम खराब होने के कारण चने की फसल पर इल्ली का प्रकोप।

उत्पादन में कमी होने की आशंका

तीन हजार प्रति क्विंटल से

ज्यादा हो चने की कीमत

लगाटाबोड़ के किसान अर्जुन साहू व फतीश साहू ने कहा कि वे तीन हजार पांच सौ रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदकर चना लगाए हैं। एक तरफ जहां इल्ली से फसल बचाने के प्रयास में लगे हैं। वहीं दूसरी ओर इस वर्ष चने की फसल को बेचने के लिए वे सोच में पड़ गए हैं, क्योंकि वर्तमान में चने की व्यापारियों द्वारा दो हजार रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से लिगया जा रहा है। अगर यही कीमत रही तो चना बेचकर भी उन्हें आर्थिक बोझ का नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जिस चना को वे तीन हजार 500 रुपए प्रति क्विंटल में खरीदकर लगाए हैं। उन्हें भला 20 हजार रुपए प्रति क्विंटल में कैसे बेच सकते हैं। तीन हजार रुपए प्रति क्विंटल से ज्यादा कीमत में चना को बेचने की बात क्षेत्र के किसानों ने की है।

मेढ़की के किसान अंब्रेश हिरवानी, कमलेश श्रीवास्तव ने बताया कि वे लगभग 18 एकड़ में चने की फसल ले रहे हैं। जिसमें इल्ली का प्रकोप है। जो लगातार फसल को चौपट कर रहा है। चने की फसल में फूल लग गए हैं। इल्ली फूल को ही चूस रही है, जबकि आने वाले 10 दिनों में चने की फसल में फल लगना शुरू हो जाएगा। अगर दवाई सिंचाई के बाद भी सही समय रहते इल्ली पर नियंत्रण नहीं लाया जा सका तो चने की फसल में उत्पादन कम होने की चिंता है।



मौसम खराब होने के कारण लगी बीमारी, फसल को बचाने कीटनाशक दवाई का किसान कर रहे छिड़काव