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जिले में 50 फीसदी सिंचाई का रकबा

7 वर्ष पहले
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ञ्चजिले वासी कृषि कालेज एवं कृषि पर आधारित उद्योग की कर रहे हैं मांग।
ञ्चघोषणा के बाद कृषि अनुसंधान केंद्र भी अब तक नहीं खुल पाया
भास्कर न्यूज - बालोद
जिले में 50 फीसदी सिंचाई रकबा होने के बाद नहीं खुला कृषि उद्योग। जिले वासी कृषि कालेज एवं कृषि पर आधारित उद्योग की कर रहे है मांग। कृषि अनुसंधान केंद्र भी अब तक नहीं खुल पाया। जिले में पर्याप्त जीवनदायिनी होने के बाद भी जिले में अब कृषि पर आधारित उद्योग की स्थापना नहीं हुई है। जिले में 89 हजार 318 हेक्टेयर सिंचिंत रकबा होने के बाद भी जिले को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बालोद को जिला बने दो वर्ष हो गए है। जिले वासी जिला बनने के पहले ही कृषि कालेज और अनुसंधान केन्द्र की जरूरत महसूस करते आ रहे है। जिलेवासियों को उम्मीद थी कि जिला बनने के बाद कृषि के क्षेत्र में बालोद को कुछ मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
नागरिकों ने सीएम को सौंपा था ज्ञापन : अब 2014 नए वर्ष का आगाज हो गया है लोगों को शासन से कई उम्मीदें है कि जिले में कृषि पर आधारित उद्योग एवं कृषि कालेज की सौगात दें। इस संबंध में 20 जनवरी को जब सीएम डा. रमन सिंह आए थे तो नागरिकों ने उन्हें मांग पत्र सौंपा था।
एक लाख 73 हजार खरीफ एवं 82 हजार हेक्टेयर में रबी फसल : कृषि विभाग के अनुसार जिले में लगभग एक लाख 73 हजार 812 हेक्टेयर में खरीफ व 82 हजार 459 हेक्टेयर में रबी फसल ली जाती है। जिसमें बालोद ब्लाक में 20 हजार 462, गुरूर में 27860, डौंडी 24 हजार 915, डौंडीलोहारा 50 हजार 575 एवं गुंडरदेही में 50 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसल लिए जाते है। वहीं रबी फसल की बात की जाए तो बालोद ब्लाक में 11 हजार 391, गुरूर में 14 हजार 269, डौंडी में 11 हजार 435, डौंडीलोहारा में 31 हजार 224 एवं गुंडरदेही में 14 हजार 140 हेक्टेयर में रबी फसल ली जाती है। जिले में स्रोत वार सिंचाई क्षेत्र नहर से 55324, तालाब से 375, नलकूप से 27968, कुआं से 821 एवं अन्य साधनों से 4830 रकबा में सिंचाई होती है।



कृषि को लेकर अपार संभावनाएं

॥बालोद जिले में कृषि को लेकर अपार संभावनाएं है। इसके लिए हम समय-समय पर शासन को लिखते है। कृषि से संबंधित किसानों की सुविधाओं के लिए हम लगातार प्रयासरत हैं। किसानों को और भी अधिक सुविधा दिलाने हम प्रयासरत रहेंगे। व्हीपी चौबे, डीडीए बालोद

कृषि कॉलेज के पक्ष में हैं विधायक



जिले में सिंचित रकबा

ब्लाक रकबा

बालोद 18732

गुरूर 24742

गुंडरदेही 26776

डौंडीलोहारा 15492

डौंडी 3576

जिले में रबी फसल

फसल रकबा

गेहूं 3245

चना 10651

सरसों 3270

जिले में सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध

जिले में सिंचाई के साधन पर्याप्त है। वर्षा की भी जिले के किसानों पर मेहरबान रहती है। जो जिले को कृषि क्षेत्र में अग्रणी रखता है। सिंचाई विभाग के अनुसार जिले में सिंचाई का बड़ा स्त्रोत तांदुला जलाशय भी है। जिससे 37 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होती है। वर्तमान में भी इस जलाशय से खेतों से रबी फसल की सिंचाई हेतु पानी दीया जा रहा है। इसके बाद मध्यम स्त्रोत के तहत गोंदली व खरखरा जलाशय है। जिससे 7 हजार से 10 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होती है। इस जलाशय से भी क्षेत्र के किसानों को रबी फसल के लिए पानी दिया जा रहा है। इसके अलावा जिले में कई माइनर है, जिनसे किसानों के खेतों तक पानी पहुंचता है। नदी, नालों के माध्यम से किसान सिंचाई करते है। जिले में सिंचाई का कुल रकबा 75 प्रतिशत है। ऐसे सिंचाई साधन संपन्न जिले में कृषि क्षेत्र में बेहतर विकास की संभावना बनती है। साथ ही किसानों की दशा सुधारने में सहायक है। शासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। जिले में सिंचाई के पर्याप्त साधन होने के बावजूद कृषि कालेज और अनुसंधान केन्द्र नहीं खुल पाए है। कृषि स्कूल व कालेज तथा अनुसंधान केन्द्र खोलकर युवा शक्ति को कृषि क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित करने से भविष्य सुनहरा हो सकता है।

जिले में ८९ हजार ३१८ हेक्टेयर सिंचित रकबा

जिले की जीवनदायिनी तांदुला जलाशय।

जिले में सिंचाई के पर्याप्त साधन होने के कारण जरूरी है कि यहां कृषि कालेज खोला जाए।

॥बालोद कृषि प्रधान जिला हो सकता है। यहां कृषि से संबंधित ऐसे उद्योग लगने चाहिए। शासन भले ही फसल में बोनस न दें लेकिन किसानों को धान का समर्थन मूल्य अच्छा मिलना चाहिए। धान के साथ-साथ अन्य फसलों का भी रेट बढ़े। तभी किसानों को उनकी मेहनत का सही फल मिल पाएगा। शक्कर कारखाना तो लग गया है लेकिन यह गन्ने की कमी के कारण चल नहीं पाता। शासन को किसानों के लिए लाभदायी योजना शुरू करनी चाहिए। जिससे किसान खुशहाल हो सकें।

अनिला भेंडिया, विधायक डौंडीलोहारा



॥ जिले में पर्याप्त साधन है। इसलिए कृषि अनुसंधान खोलने की मांग शासन से करेंगे। कृषि यंत्रों के अनुदान योजना में जहां शासन 50 प्रतिशत अनुदान देता है। इसमें कुछ यंत्रों में निर्धारित सीमा को लेकर परेशानी आती है। किसानों को वास्तविक कीमत का 50 फीसदी अनुदान मिले । नियम कायदों से बंधे किसान इन योजनाओं का फायदा नहीं उठा पाते। यह किसानों को विकास के बजाए पीछे की ओर धकेलने जैसी बात है।

राजेन्द्र राय, विधायक गुंडरदेही

॥कृषि महाविद्यालय, कृषि इंजीनियरिंग महाविद्यालय खुलने से जिला कृषि क्षेत्र में तेजी से अग्रसर होगा। युवा वर्ग जो आज खेती से विमुख हो रहे है। वे कृषि के बारे में नई जानकारी हासिल कर नया-नया प्रयोग करेंगे। नए अनुसंधान केन्द्रों से किसानों को भी नई तकनीक सीखने का मौका मिलेगा। इससे धान ही नहीं अन्य फसल जैसे गन्ना, सरसों, ज्वार बाजरा, गेहूं, सूरजमुखी का रकबा भी बढ़ेगा। किसान लाभ नहीं ले पा रहे है।

भैयाराम सिन्हा विधायक, बालोद

11 साल पुरानी है मांग

कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग 11 साल पुरानी है। नागरिक इस संबंध में कई बार शासन, प्रशासन को मांग पत्र सौंप चुके हैं। इसके बाद भी कृषि के क्षेत्र में बालोद को अब तक कुछ नहीं मिल पाया है। अब जिले की राजनीतिक दृष्टिकोण भी बदल चुकी है। नागरिक जब कृषि अनुसंधान केंद्र की मांग कर रहे थे। उस समय जिले के तीनों विधानसभा सीट में भाजपा काबिज थी। जिले में भाजपा की सत्ता होने की बाद भी कृषि के क्षेत्र में कुछ नहीं मिल पाया। अब बालोद के तीनों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के विधायक विराजमान है। ऐसे में लोगों की सोच है कि क्या हमारी मांग पूरी होगी? फिर भी जिलेवासियों को आस है कि सीएम नागरिकों की मांगों को जरूर पूरा करेंगे।

कारखाने का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष डोमेंद्र भेडिय़ा का कहना है, कि जिला बनने से पहले ही यहां शक्कर कारखाना तो गया है। लेकिन कारखाना का लाभ अभी तक जिले के किसान सही ढंग से नहीं उठा पा रहे है। यहां के किसानों के कारखाने में बाहर के किसानों का गन्ना खप रहा है। लोकल क्षेत्र में गन्ना नहीं होने की स्थिति में दूसरों जिलों से कारखाना को चलाया जा रहा है। गन्ना खेती की ओर अगर विभाग पहल करें तो गन्ने के लिए दूसरे जिलों पर आश्रित नहीं होना पड़ेगा। जिले में ही गन्ने की खेती होने से किसानों को अच्छा लाभ मिल सकता है। धान के अलावा यदि किसान गन्ना भी लगाए तो किसानों को फायदा होगा। लेकिन किसानों को इसके लिए विशेष तौर से प्रोत्साहित करना होगा।

बने कृषि प्रधान जिला

जिला बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि यहां पर कृषि कॉलेज व कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज मिलेगी। यहां के जलाशयों से जिले के अलावा अन्य जिले के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है।