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पंचायतों के डिजिटल कैमरे हुए खराब

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज.बालोद
लगभग पांच साल पहले राज्य शासन के निर्देशानुसार मुलभूत राशि खर्च करके डिजिटल कैमरे की खरीदी की गई थी। सभी पंचायतों में ये कैमरे पंचायत सचिव या रोजगार सहायक की अभिरक्षा में रखे थे। दो-तीन साल में ही कैमरे की क्वालिटी पर सवाल उठने शुरू हो गए थे। यही कारण है कि आधे से ज्यादा पंचायतों में कैमरे आए दिन खराब होते रहते हैं। क्वालिटी खराब होने से ये कैमरे अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। जनपद पंचायत बालोद से मिली जानकारी के अनुसार जिन पंचायतों में सस्ते दर पर कैमरा खरीदा गया है वहां कैमरे बिगडऩे की शिकायत मिल रही है। शेष अन्य पंचायत जहां अच्छी कंपनी व महंगे कैमरे खरीदे गए वहां किसी प्रकार की शिकायत नहीं है, लेकिन ऐसे पंचायतों की संख्या नहीं के बराबर है।
पंचायत इंस्पेक्टर चंपेश्वर यदु का कहना है कि ग्राम पंचायतों में 4500 से 7000 रुपए तक के कैमरे खरीदी गए हैं। कैमरा यदि बिगड़ रहा है तो उसे पंचायत द्वारा ही सुधरवाया जा रहा है। इस कैमरे का उपयोग मतदाता फोटो परिचय पत्र रोजगार गारंटी के तहत चले कार्य में किया जाता है। उन्होंने कहा कि क्वालिटी कैमरे की सेटिंग से भी प्रभावित हो सकती है। फंक्शन की सही जानकारी नहीं होने के कारण कैमरे से ली गई तस्वीर खराब हो सकती है। कैमरे बिगडऩे की शिकायत आ सकती है। डिजिटल कैमरा चलाना काफी आसान है। इसलिए सचिव को ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ती जैसे मोबाइल चलाना सभी जानते हैं वैसे ही कैमरा भी चला लेते हैं।



2009 की है कैमरे खरीदने की योजना

जिला प्रशासन ने जनवरी 2009 में पंचायतों में कैमरा खरीदी की योजना बनाई। मतदाता परिचय पत्र, रोजगार गारंटी और राशन कार्ड के लिए फोटो अनिवार्य कर दिया। जिला प्रशासन ने संबंधित योजना की फोटोग्राफी की अनिवार्यता को देखते हुए आंतरिक व्यवस्था की। इसके तहत ग्राम पंचायतों में सरपंच, सचिव को डिजिटल कैमरा खरीदने के निर्देश दिए गए। इस योजना के तहत मुलभूत राशि ढाई हजार रुपए का आहरण किया जाना था।

कैमरा चलाना नहीं आता

ज्यादातर पंचायतों में कोडक कंपनी के कैमरे हैं। जिनकी कीमत 4 से 6 हजार रुपए है। कुछ रोजगार सहायक व पंचायत सचिव ऐसे भी हैं जिन्हें अभी तक कैमरा चलाना नहीं आता। कई पंचायत सचिवों को कैमरे में फंक्शन, लाईट, साइज आदि सेट करना नहीं आता। वहीं एक शिकायत सभी पंचायतों में है कि रात या कम रोशनी में फोटो खींचना मुश्किल होता है।



पंचायतों में रखे डिजिटल कैमरे हुए अनुपयोगी। कई पंचायतों में बिगड़े पड़े हैं कैमरे तो कई जगह क्वालिटी खराब की शिकायत।