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शीतल पेय पदार्थों के नाम पर बिक रहा जहर

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - सक्ती

अप्रैल की गर्मी शुरू होते ही ब्लाक मुख्यालय सहित क्षेत्र के गांवों की गलियों में मीठा जहर बिकना शुरू हो गया है। ठेले और छोटी दुकानों में बर्फ के गोले, चुस्की, शर्बत, बादाम, मैंगो शेक, सोडा, आईसक्रीम जैसे पेय पदार्थ 5 से 30 रुपए में बिक रहे हैं। नगर में स्टेशन चौक, कचहरी चौक, बाजार रोड सहित बस स्टैण्ड के पास ऐसे दर्जनों छोटी-बड़ी दुकानें हैं।

यहां रोजाना हजारों का व्यापार होता है। इनमें से अधिकतर दुकानों में शीतल पेय के नाम पर दूषित पानी पिलाया जाता है। साइकिल, ठेला एवं अन्य साधनों से गली-गली स्वास्थ्य बिगाडऩे के सामान पहुंच रहे हैं। गर्मी से राहत पाने और गला तर करने के लिए ऐसे शीतल पेयों को पीने से पहले यदि लोग एक बार इसके बनाने की विधि पर गौर कर ले तो दुबारा इसे पीने की इच्छा नहीं होगी। रंगीन शीतल पेय ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं। फूड की जगह अनेक लोग कपड़े को रंगने वाला आम कलर का भी उपयोग करते हैं। डाक्टर भी ऐसे सामानों को खतरनाक बता रहे हैं। अधिक कमाई के चक्कर में ठेले व खोमचे वाले लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रख रहे है। खाद्य विभाग आज तक ऐसे दुकानों में दबिश नहीं दे सका है। कभी किसी ठेले या दुकान में जाकर नमूने लेने का भी प्रयास नहीं हुआ है। स्वास्थ्य, खाद्य विभाग को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। बादाम, मैंगो शेक को गाढ़ा करने के लिए अरारोट, कार्ल फ्लोर का उपयोग किया जाता है। दूध की जगह यूरिया एवं सोया से बने दूध का प्रयोग करते हैं। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग बेहिचक ऐसे पेयों को पी लेते हैं, लेकिन इसका नुकसान लोगों को बाद में दिखता है।



रंगीन पेय पदार्यों में मिलाया जाता है कपड़ो को रंगने वाला रंग, खाद्य विभाग नहीं दे रहा ध्यान