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डाउनलोड करेंरायपुर। बस्तर में नक्सलियों को मदद और फंड दिलाने में मदद करने के आरोप में फंसे नीरज चोपड़ा और धर्मेंद्र चोपड़ा का पुलिस कनेक्शन सामने आया है। भाजपा और कांग्रेस नेताओं के साथ साथ उनके पुलिस अधिकारियों से भी संपर्क होने का खुलासा हुआ है। एसआईबी अब इस दिशा में भी जांच शुरु कर दी है।
एसआईबी के अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि नेताओं को जिताने हराने में नीरज और धर्मेंद्र नक्सलियों की किस तरह से मदद ले रहे थे। दोनों अभी एसआईबी की हिरासत में है। यह भी सूचना मिली है कि जिस पुलिस अधिकारी का पैसा जिस अस्पताल में लगा है वहीं नक्सली कमांडर ने अपने दिल की जांच करवाई थी।
यह क्लू सामने आने के बाद जांच की नई दिशा मिली है। पुलिस को दस ऐसे ट्रांसपोर्टरों का पता चला है जिनके वाहनों में नीरज और धर्मेंद्र हथियार और दूसरे सामान लेकर नक्सलियों तक पहुंचाते थे। ट्रांसपोर्टरों से भी पूछताछ की जाएगी। गौरतलब है कि धर्मेंद्र और उसका भतीजा नीरज भानुप्रतापपुर के रहने वाले हैं। वहीं रहते हुए उन्होंने नक्सलियों की मदद शुरू की।
उसके बाद वे उद्योग स्थापित करने के लिए उद्योगपतियों से डील करने लगे। हमेशा रायपुर आने की झंझट से बचने के लिए उन्होंने यहां भव्य मकान बनवा लिया। वे यही रहकर डील कर रहे थे।
सरकारी अफसरों के तबादले का धंधा
नीरज और उसका चाचा नक्सलियों से करीबी होने का हवाला देकर सरकारी अफसरों को ब्लैकमेल करने लगे थे। उन्होंने अपने नक्सली कनेक्शन का सबूत भी दे दिया था। इससे उनकी सरकारी अमले में धाक बन गई थी। वे फारेस्ट, शिक्षा और हेल्थ अफसरों के तबादले करवाने लगे थे। पिछले साल उन्होंने वरिष्ठ फारेस्ट अफसर को हटवाया था। उसके बाद उनकी सरकारी अमले में अच्छी पकड़ हो गई थी।
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