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- 1971 की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना पर कहर बनकर टूटा था मिग अब शहर की शोभा पश्चिम बंगाल के कोलाईकोंड
1971 की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना पर कहर बनकर टूटा था मिग- अब शहर की शोभा - पश्चिम बंगाल के कोलाईकोंडा एयरफोर्स बेस से रिटायरमेंट के बाद लाया गया फाइटर प्लेन। - इलाहाबाद एयरफोर्स बेस के...
नगर संवाददाता
रायपुर 23 जनवरी। भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 1971 में दुश्मन सेना पर कहर बरपाने वाला फाइटर प्लेन मिग-21 अब शहर की शोभा बढ़ाएगा। एयरफोर्स से रिटायर होने के बाद बुधवार को इसे राजधानी लाया गया। नगर निगम मुख्यालय के सामने गार्डन में फाइटर प्लेन को इस मुद्रा में खड़ा किया जाएगा कि जैसे वह अभी उड़ान भरने वाला है।
मिग-21 टाइप 77 का फाइटर प्लेन अभी तक पश्चिम बंगाल के कोलाइकोंडा एयरबेस में रखा गया था। रायपुर लाने के लिए प्लेन का अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया। उसके बाद तीन बड़े ट्रेलरों में रखा गया। टुकड़ों में बंटे मिग को लादे जैसे ही ट्रेलर शहर में दाखिल हुए लोग कौतूहलवश देखने लगे। नगर निगम मुख्यालय के सामने काफी देर तक मिग को लादकर ट्रेलर खड़े रहे। इस दौरान जो भी रोड से गुजर रहा था, उसकी नजरें मिग पर ठहर रही थी। शुक्रवार को इलाहाबाद एयरफोर्स बेस से सात इंजीनियरों की टीम प्लेन को असेंबल करने पहुंचेगी। प्रभारी अधिकारी बद्री चंद्राकर ने बताया कि मैकेनिकल टीम कलाईकोंडा एयरबेस से आएगी। तकनीकी टीम इलाहाबाद से आ रही है। उसके बाद इसे रंग रोगन कर प्लेटफार्म पर खड़ा किया जाएगा। गार्डन में इसके लिए प्लेटफार्म बनाया जा चुका है। फाइटर प्लेन के साथ मैकेनिकल टीम के इंजार्च अफसर एम भट्ट एयरक्राफ्ट आए हैं। प्लेन की लंबाई 20 मीटर, चौड़ाई 10 मीटर और उंचाई 6 मीटर है।
1955 में बना पहला मिग
आर्टम मिकयोन गोरविच ने पहला मिग विमान 1955 में बनाया था। 14 फरवरी 1955 को पहली बार मिग विमान ने आकाश में उड़ान भरी। चार साल बाद तत्कालीन सोवियत यूनियन ने मिग-21 के एफ सीरिज के लड़ाकू विमान को अपने बेड़े में शामिल किया। अब तक मिग लड़ाकू विमान को 60 देशों ने एयरफोर्स बेड़े में शामिल किया है। सोवियत यूनियन, भारत और लीबिया की एयरफोर्स ने अपने बेड़े में सबसे ज्यादा इसी विमान का उपयोग किया। 1971 के इंडिया-पाकिस्तान वार के अलावा बंगलादेश लिबरेशन वार, कारगिल वार में भी मिग सीरिज के विमानों ने पाकिस्तानी सेना पर बमबारी की थी।
विद्यार्थी आते-जाते देखें और प्रेरणा लें
मिग को निगम मुख्यालय के सामने लगाने का फैसला सोच समझकर लिया गया है। इस इलाके के आसपास बड़ी संख्या में स्कूल और कालेज है। स्कूल और कालेज आते-जाते विद्यार्थी 1971 वार और कारगिल युद्ध के हीरो रहे मिग 21 को देखकर एयरफोर्स में भर्ती होने के प्रति प्रेरित होंगे। पहले यह सोचा गया था कि शहर के किसी मुख्य चौराहे में इसे लगाया जाए। मगर मिग 21 को ऐसे स्थान पर लगाने का निर्णय लिया गया, जिस रास्ते से सबसे ज्यादा स्कूल और कालेज के छात्र गुजरते हैं। सेंटपाल स्कूल, होलीक्रास बैरनबाजार और पेंशनबाड़ा, गवर्नमेंट स्कूल, कालीबाड़ी स्कूल, सप्रे स्कूल, दानी गल्र्स स्कूल, हिंदू हाई स्कूल, डिग्री गल्र्स कालेज और महंत कालेज है।
फैक्ट फाइल
- मिग 21 फाइटर प्लेन बना 1955 में।
- 1959 में पहली बार सोवियत यूनियन ने एयरफोर्स बेड़े में मिग 21 की एफ सीरिज को शामिल किया।
- सोवियत यूनियन के बाद सबसे ज्यादा मिग सीरिज के विमानों का उपयोग भारत ने किया है।
जीई रोड पर लगाई जा चुकी है कारगिल की तोप
मिग के पहले कारगिल युद्ध में शामिल होने वाली तोप शहर में लाई जा चुकी है। तोप को जीई रोड पर अनुपम गार्डन के पास सड़क के किनारे ही सजाया गया है। तोप को उसी हालत में रखा गया है, जिस स्थिति में वह दुश्मनों के बेड़े में हमला करती थी। इसके अलावा डब्लूआरएस कार्यालय परिसर में अंग्रेजों के शासनकाल का भाप इंजन रेलवे कार्यालय की शोभा बढ़ा रहा है। इंजन को अच्छी तरह मरम्मत के बाद लगाया गया है। वह इंजन भी अपने आकार और बनावट के कारण लोगों का ध्यान अपनी ओर खिंचता है। इसी तरह टाउन हॉल में भी ब्रिटिश कालीन स्टीम इंजन शहर की शोभा बढ़ाने के लिए रखा गया है।
विद्यार्थी आते-जाते देखें और प्रेरणा लें
मिग को निगम मुख्यालय के सामने लगाने का फैसला सोच समझकर लिया गया है। इस इलाके के आसपास बड़ी संख्या में स्कूल और कालेज है। स्कूल और कालेज आते-जाते विद्यार्थी 1971 वार और कारगिल युद्ध के हीरो रहे मिग 21 को देखकर एयरफोर्स में भर्ती होने के प्रति प्रेरित होंगे। पहले यह सोचा गया था कि शहर के किसी मुख्य चौराहे में इसे लगाया जाए। मगर मिग 21 को ऐसे स्थान पर लगाने का निर्णय लिया गया, जिस रास्ते से सबसे ज्यादा स्कूल और कालेज के छात्र गुजरते हैं। सेंटपाल स्कूल, होलीक्रास बैरनबाजार और पेंशनबाड़ा, गवर्नमेंट स्कूल, सप्रे स्कूल, हिंदू हाई स्कूल, डिग्री गल्र्स कालेज और महंत कालेज है।
1955 में बना पहला मिग
आर्टम मिकयोन गोरविच ने पहला मिग विमान 1955 में बनाया था। 14 फरवरी 1955 को पहली बार मिग विमान ने आकाश में उड़ान भरी। चार साल बाद तत्कालीन सोवियत यूनियन ने मिग-21 के एफ सीरिज के लड़ाकू विमान को अपने बेड़े में शामिल किया। अब तक मिग लड़ाकू विमान को 60 देशों ने एयरफोर्स बेड़े में शामिल किया है। सोवियत यूनियन, भारत और लीबिया की एयरफोर्स ने अपने बेड़े में सबसे ज्यादा इसी विमान का उपयोग किया। 1971 के इंडिया-पाकिस्तान वार के अलावा बंगलादेश लिबरेशन वार, कारगिल वार में भी मिग सीरिज के विमानों ने पाकिस्तानी सेना पर बमबारी की थी।
स्कूल से लौट रहे बच्चे देखकर ठिठके
नगर संवाददाता - रायपुर
भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 1971 में दुश्मन सेना पर कहर बरपाने वाला फाइटर प्लेन मिग-21 अब शहर की शोभा बढ़ाएगा। एयरफोर्स से रिटायर होने के बाद बुधवार को इसे राजधानी लाया गया। नगर निगम मुख्यालय के सामने गार्डन में फाइटर प्लेन को इस मुद्रा में खड़ा किया जाएगा कि जैसे वह अभी उड़ान भरने वाला है।
मिग-21 टाइप 77 का फाइटर प्लेन अभी तक पश्चिम बंगाल के कोलाइकोंडा एयरबेस में रखा गया था। रायपुर लाने के लिए प्लेन का अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया। उसके बाद तीन बड़े ट्रेलरों में रखा गया। टुकड़ों में बंटे मिग को लादे जैसे ही ट्रेलर शहर में दाखिल हुए लोग कौतूहलवश देखने लगे। नगर निगम मुख्यालय के सामने काफी देर तक मिग को लादकर ट्रेलर खड़े रहे। इस दौरान जो भी रोड से गुजर रहा था, उसकी नजरें मिग पर ठहर रही थी। शुक्रवार को इलाहाबाद एयरफोर्स बेस से सात इंजीनियरों की टीम प्लेन को असेंबल करने पहुंचेगी। प्रभारी अधिकारी बद्री चंद्राकर ने बताया कि मैकेनिकल टीम कलाईकोंडा एयरबेस से आएगी। तकनीकी टीम इलाहाबाद से आ रही है। उसके बाद इसे रंग रोगन कर प्लेटफार्म पर खड़ा किया जाएगा। गार्डन में इसके लिए प्लेटफार्म बनाया जा चुका है। फाइटर प्लेन के साथ मैकेनिकल टीम के इंजार्च अफसर एम भट्ट एयरक्राफ्ट आए हैं। प्लेन की लंबाई 20 मीटर, चौड़ाई 10 मीटर और उंचाई 6 मीटर है।
शहर की शान बढ़ाएगा फाइटर मिग