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मिलरों को समितियों से नहीं मिलेगा धानञ्च खाद्य विभाग का आदेश, धान खरीदी में मचा नया बवालञ्च मिलरों को केवल धान संग्रहण केंद्रों से ही मिलेगा धान ञ्च राइस मिलर्स एसोसिएशन ने कहा...

8 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - रायपुर
धान खरीदी को लेकर नया बवाल खड़ा हो गया है। खाद्य विभाग ने राज्य के सभी मिलरों को कह दिया है कि उन्हें अब धान सहकारी समितियों के बजाय सीधे धान संग्रहण केंद्रों से लेना होगा। इस आदेश के पहले तक विभाग ने यह व्यवस्था की थी कि मिलर 15 फरवरी तक सहकारी समितियों से भी धान का उठाव कर सकते थे। गुरुवार को आदेश जारी कर अचानक यह व्यवस्था बदल दी गई। अब उन्हें किसी भी परिस्थिति में धान का उठाव संग्रहण केंद्रों से करना होगा। विभाग के इस फैसले का राइस मिलर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने विभाग के आला अफसरों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रांसपोर्टरों को फायदा पहुंचाने के लिए धान खरीदी के बीच में यह नियम लागू कर दिया गया है। नया नियम लागू होने की वजह से ट्रांसपोर्टर पहले सहकारी समितियों से धान लोड कर उसे संग्रहण केंद्रों में पहुंचाएंगे। इसके बाद संग्रहण केंद्रों से मिलों तक धान पहुंचाया जाएगा। दो बार ट्रांसपोर्ट होने की वजह से ट्रांसपोर्टरों को डबल गाड़ी भाड़ा मिलेगा। इससे राज्य सरकार को 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान होगा।




छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग ने इस नियम को लागू करने से पहले एसोसिएशन को भी जानकारी नहीं दी। यही वजह है कि गुरुवार की सुबह राइस मिल वाले जब सहकारी समितियों में धान लेने के लिए पहुंचे तो उन्हें डिलीवरी ऑर्डर नहीं दिया गया। समितियों के संचालकों ने उनसे कहा कि उन्हें धान अब संग्रहण केंद्रों से मिलेगा। इस बात को लेकर मिलर्स और समिति संचालकों के बीच जमकर बहस हुई। कुछ देर की तनातनी के बाद भी मिलरों को समितियों से धान नहीं दिया गया।

समितियों में हंगामा, नहीं भरी गाडिय़ां

बड़ी मात्रा में खराब होगा धान

खाद्य विभाग ने 15 फरवरी तक 80 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। विभाग के अनुसार अब तक 50 लाख टन धान की खरीदी हो गई है। 15 फरवरी तक धान की खरीदी होती है तो यह लक्ष्य पूरा हो जाता, लेकिन ऐन समय में धान खरीदी केवल संग्रहण केंद्रों से होने की वजह से तीस लाख टन धान की खरीदी भी प्रभावित होगी। इतना ही नहीं दो जगहों से धान उठाने पर बारदाना और धान का लॉस भी होगा। मिलरों से कहना है कि बार-बार धान के बोरों को रखने और उठाने में दो से चार किलो तक धान खराब हो सकता है। नुकसान राज्य सरकार को झेलना होगा।