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चेंबर में और इस्तीफे, कुर्सी दौड़ हुई तेज

8 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - रायपुर
छत्तीसगढ़ चेंबर के चुनाव में भले ही करीब पांच माह बाकी हों, लेकिन अभी से घमासान मच गया है। विभिन्न पदों के लिए तीन पैनलों के बीच विभाजन रेखा साफ नजर आ रही है। काजू-किशमिश को लेकर विवाद और युवा चेंबर की ताजा नियुक्ति तथा एक इस्तीफे के बाद व्यापारियों में ध्रुवीकरण तेज होने लगा है।
शुक्रवार को युवा चेंबर के सात और पदाधिकारियों-सदस्यों के इस्तीफों से माहौल गरमा गया है। पिछले साल चेंबर चुनाव दो मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल और राजेश मूणत की परोक्ष लड़ाई का मैदान बना था। माना जा रहा कि इस बार यह लड़ाई और तेज हो सकती है। उधर, तीन पैनल के प्रमुखों ने भी अपने लिए समर्थन जुटाने और व्यापारियों से मुलाकातों का दौर चला दिया है। चेंबर के अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी के विधायक बनने के बाद अब हर किसी को यही लग रहा है कि अगर यह कुर्सी मिल गई तो किसी भी दल में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। यही वजह है कि चेंबर अध्यक्ष के लिए इस बार खींचतान के हालात हैं।


आम सहमति की बातें केवल कागजी हो गई हैं। चुनाव के ठीक पहले युवा चेंबर में सतीश जग्गी और पूरनलाल अग्रवाल के बेटे प्रकाश अग्रवाल को महामंत्री बनाना सुंदरानी पैनल को भारी पड़ रहा है। इस नियुक्ति को मनमानी बताकर दूसरे पैनल वालों ने इस विरोध को भुनाना शुरू कर दिया है। एक पैनल ऐसा भी है जो इस बात पर जोर दे रहा है कि चेंबर का अध्यक्ष इस बार सिंधी समाज से नहीं होना चाहिए।
खर्च का हिसाब मांगा
छत्तीसगढ़ चेंबर में कई पैनल तैयार होने के बाद अब चेंबर के खर्चों पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सुंदरानी पैनल से नाराज लोगों ने आरोप लगाया है कि हर साल होने वाले व्यापार मेले का हिसाब-किताब कोषाध्यक्ष को नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा दिवाली मिलन समारोह समेत कई सम्मेलनों में खर्चों को लेकर जमकर अनियमितताएं बरती गई हैं। हालांकि चेंबर अध्यक्ष सुंदरानी ने इन सभी आरोपों को सिरे से नाकार दिया है। उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा कि सभी खर्चों की जानकारी कोषाध्यक्ष के पास है। किसी को कोई आपत्ति है तो उसे प्रमाण के साथ बात करनी चाहिए।




इन लोगों ने पेश कर दी है दावेदारी

सात इस्तीफे और

युवा चेंबर के नए अध्यक्ष के नाम की अधिकृत घोषणा होने के साथ ही शुक्रवार को युवा चेंबर के सात और पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। इनमें युवा चेंबर के प्रदेश उपाध्यक्ष बजरंग खंडेलवाल, सुभाष बजाज, संदीप अग्रवाल और हरपाल सिंह भामरा, प्रदेश मंत्री सुधीर फौजदार, कार्यकारिणी सदस्य नरसा लालवानी और भरत पमनानी शामिल हैं। इनका आरोप है कि चेंबर अध्यक्ष ने मनमानी करते हुए जग्गी की नियुक्ति की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कार्यकारी अध्यक्ष अमर धावना को सारे अधिकार दिए जा सकते हैं।



सुंदरानी समर्थक बढ़े

छत्तीसगढ़ चेंबर में जब 2010 में चुनाव हुए थे, तब सदस्यों की संख्या 10 हजार थी। इनमें से तीन हजार नए सदस्य ललित जैसिंघ और पूरनलाल अग्रवाल ने बनाए थे। श्रीचंद के अध्यक्ष बनते ही इनमें से तीन हजार सदस्यों का नाम इसलिए काट दिया गया क्योंकि वे सदस्य बनने की पात्रता नहीं रखते थे। सुंदरानी ने अपने तीन साल के कार्यकाल में पांच हजार नए सदस्य बनाए। इस वजह से चेंबर में अब सदस्यों की संख्या 12 हजार हो गई है। चुनाव के समय नए सदस्य सुंदरानी पैनल को समर्थन देते हैं तो इस गुट को लाभ हो सकता है।



चेंबर में चुनावी घमासान तो नजर आ रहा है, लेकिन किसी पैनल ने अब तक अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। चेंबर सदस्यों का सारा ध्यान अध्यक्ष पद पर है। फिलहाल तीन पैनल नजर आ रहे हैं। उनमें से एक श्रीचंद के समर्थक और दूसरा हाल के फैसले से नाराज व्यापारियों का है। तीसरे पैनल के लिए राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल भी समर्थन जुट गए है। अध्यक्ष के लिए अमर धावना, जितेंद्र बरलोटा, योगेश अग्रवाल, यूएन अग्रवाल, ललित जैसिंघ और किशोर आहूजा के नाम सामने आए हैं।

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