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उत्तरपुस्तिका की फोटो कॉपी देने की योजना ठंडे बस्ते में

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - रायपुर
पुनर्मूल्यांकन के बढ़ते मामले को देखते हुए उत्तरपुस्तिका की फोटो कॉपी देने की योजना बनाई थी। लेकिन अब यह ठंडे बस्ते में चली गई है। इसकी मुख्य समस्या स्टॉफ और संसाधनों की कमी को माना जा रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि योजना पर काम किया जा रहा है। लेकिन कब से योजना लागू होगी यह नहीं कहा जा सकता।
रविवि की मुख्य परीक्षाओं के परिणाम से असंतुष्ट होकर हर साल बड़ी संख्या में छात्र पुनर्मूल्यांकन व पुनर्गणना के लिए आवेदन करते हैं। इससे जहां एक ओर विवि पर दबाव बना रहता है वहीं छात्र भी परिणाम के इंतजार में रहते हैं। इसे देखते हुए विवि ने दो साल पहले एक योजना बनाई थी। इसके तहत छात्रों को परिणाम के बाद उत्तरपुस्तिका की फोटो कॉपी दी जानी थी। इसमें विवि की मंशा थी कि छात्र पहले खुद ही चेक की हुई उत्तरपुस्तिका को देख ले। इसके बाद भी उसे लगे तब ही वह आवेदन करे।
लेकिन यह योजना अब ठंडे बस्ते में चली गई है। सूत्रों ने बताया कि विवि में हर साल दो लाख से ज्यादा छात्र शामिल हो रहे हैं। इनकी उत्तरपुस्तिका की फोटो कॉपी देने के लिए अलग सेल बनाना होगा। इसके लिए जरूरी संसाधनों के साथ स्टॉफ भी लगेंगे। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए विवि ने इस योजना पर गंभीरता नहीं दिखाई। इस मामले मे विवि के कुलसचिव केके.चंद्राकर का कहना है कि उत्तरपुस्तिका की फोटोकॉपी देने में कई तरह की परेशानियां हैं। इसे देखा जा रहा है। अभी यह नहीं कहा जा सकता कि कब इस योजना का लाभ मिलेगा।
विवि को भी मिलती राहत : पुनर्मूल्यांकन के लिए विवि को इन उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन फिर से करना पड़ता है। बड़ी संख्या में आवेदन आने की वजह से परिणाम निकालने में भी दिक्कत होती है। इसी तरह पुनर्मूल्यांकन के बाद अंकों में २० फीसदी की बढ़ोतरी होने पर फिर से इन्हें मशक्कत करनी होती है। उत्तरपुस्तिका की फोटो कॉपी देखने के बाद छात्रों की संख्या में भारी कटौती हो सकती है। जिससे विवि को राहत मिलती।



हजारों छात्रों को मिलती राहत

जानकारों के मुताबिक इस योजना के लागू होने से हजारों छात्रों को राहत मिलती। हर साल विवि में करीब २५ से ३० हजार छात्र पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करते हैं। पुनर्मूल्यांकन के बाद इनमें से कई छात्रों के परिणाम में कोई बदलाव नहीं होता। पहले से इन्हें मालूम हो जाता तो वे आवेदन करने से बच जाते। इससे विवि पर भी दबाव कम होता।