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मप्र के अफसर को क्यों बनाया डीजी, याचिका

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बिलासपुर/रायपुर
मध्यप्रदेश के पुलिस अधिकारी डॉ. आनंद कुमार को छत्तीसगढ़ का डीजीपी बनाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मंगलवार को दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ पुलिस एक्ट में तय किए गए प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होने की उम्मीद है। उधर, डीजीपी पद के लिए तगड़े दावेदार माने जा रहे जेल डीजी गिरधारी नायक अचानक छुट्टी पर चले गए हैं। आनंद कुमार को डीजीपी बनाए जाने से वे नाराज बताए जा रहे हैं। नायक की छुट्टी को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि आनंद कुमार एक फरवरी को यहां ज्वाइन कर लेंगे। इसके खिलाफ बीके
मनीष ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है। शेष - पेज ११


इसमें कहा गया है कि छत्तीसगढ़ पुलिस एक्ट की धारा 12((2)) के तहत प्रावधान है कि राज्य के डीजी चयन करने के लिए डीजी रैंक के तीन पुलिस अधिकारियों का पैनल बनाया जाएगा। इसमें से डीजीपी का चयन होगा। इसी तरह एक्ट की धारा 1((3)) में कहा गया है कि एक्ट छत्तीसगढ़ में लागू होगा। धारा 2((1)) ज में पुलिस अधिकारी को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि पुलिस अधिकारी का अर्थ है, वे अधिकारी जो छत्तीसगढ़ पुलिस में कार्यरत हैं या जो यहां प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हैं। आनंद कुमार दोनों की योग्यता पूरी नहीं करते, इसके बावजूद उन्हें डीजीपी नियुक्त करना एक्ट का उल्लंघन है।
उधर, जेल डीजी गिरधारी नायक नाराज होकर छुट्टी पर चले गए हैं। डीजीपी रामनिवास 31 जनवरी को रिटायर हो रहे हैं। उनके बाद गिरधारी नायक सबसे वरिष्ठ हैं। नक्सल इलाकों में लगातार काम करने की वजह से भी उनका दावा पुख्ता माना जा रहा था। आनंद कुमार अभी प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में है। शासन ने उन्हें दिल्ली से यहां भेजने के लिए केंद्र सरकार को चिट्ठी लिख दी है, इसलिए उनका डीजीपी बनना तय है। समझा जाता है कि नायक इसी से नाराज हैं। हालांकि 2 फरवरी को ड्यूटी पर लौट जाएंगे। इसलिए एक वर्ग यह भी कह रहा है कि नाराज नहीं हैं, अन्यथा इतनी जल्दी छुट्टी से नहीं लौटते।