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डीके अस्पताल में दाखिल होते ही हर कदम पर लगेगी फीसआशंका- डीकेएस पीपीपी फार्मूले पर चला तो सरकारी नहीं रह जाएगा- सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं देने की घोषणा पर अब उठे सवाल
दो बार बदला प्लान
मंत्रालय को डीकेएस भवन से नया रायपुर में शिफ्ट करने का प्लान दो बार बदल चुका है। पहले तय हुआ था कि डीकेएस का आंबेडकर अस्पताल-2 के रूप में उपयोग किया जाएगा। उसके बाद मनोरोग, स्किन, दंत रोग और टीबी एवं चेस्ट विभाग की ओपीडी डीकेएस भवन में शिफ्ट की गई। अभी इन चारों विभाग की ओपीडी वहीं चल रही हैं। कुछ दिन पहले तक इन चारों विभागों की आईपीडी चालू करने की तैयारी थी, इसी बीच डीकेएस को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में तब्दील करने की घोषणा की गई।
आयुष्मान भी फेल
आंबेडकर अस्पताल के एक हिस्से में जोगी शासनकाल में आयुष्मान एंडोस्कोपी सर्जरी यूनिट शुरु की गई थी। यूनिट के लिए करीब सात करोड़ खर्च किए गए। हाईटेक मशीनें खरीदी गईं। कुछ साल तक इस यूनिट को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल ने चलाया, लेकिन गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज दिलाने में शासन नाकाम रहा। आखिरकार मंथन के बाद सरकार ने सर गंगाराम अस्पताल से अनुबंध तोड़ लिया। इसके बाद यहां ताला लटका रहा। यह अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
डिग्री कैसे मिलेगी?
शासन ने अगर डीके अस्पताल को पीपीपी फार्मूले पर संचालित करने की मंजूरी दे दी तो यह मेडिकल कॉलेज का हिस्सा ही नहीं रहेगा। उसके बाद मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेश्यालिटी विभागों की डिग्री कोर्स खोलने के औचित्य पर प्रश्नचिन्ह लग जाएगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया भी तभी मान्यता देगी, जब सुपर स्पेशलिटी विभागों का संचालन मेडिकल कॉलेज करेगा। मेडिकल कॉलेज के गोल्डन जुबली समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी डिग्री खोलने की बात कह चुके हैं।