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कोर्ट-कचहरी नहीं, हमें जमीन दिला दो

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - रायपुर
न्यू स्वागत विहार में संजय बाजपेयी से प्लाट खरीदने वाले जितने नाराज बिल्डर संजय वाजपेयी से हैं, उतना ही गुस्सा उनमें शासन और प्रशासन के लिए भरा है। पीडि़तों का कहना है जमीन खरीदी के पहले उन्होंने दस्तावेजों को कलेक्टोरेट और तहसील दफ्तर में चेक करवाया। बी-वन खसरा लेने के बाद तहसीलदार से प्रमाणित करवाया। सरकारी विभागों से यह प्रमाणपत्र दिया गया कि जमीन को लेकर विवाद नहीं है, उसके बाद ही प्लॉट खरीदा गया। अब शासन ने ले-आउट निरस्त कर जमीन की रजिस्ट्री को अवैध कर दिया। इसमें हमारी गलती कहां है?
अब तक जमीन मिलने की आस में शासन की ओर टकटकी लगाकर देख रहे पीडि़त परिवार बुधवार को पहली बार एकजुट हुए। उन्होंने तय किया कि अब वे मिलजुल कर लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन वे न तो बिल्डर के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराना चाहते हैं और न ही उन्हें कोर्ट के चक्कर लगाना मंजूर है। पीडि़तों का कहना है कि हमें तो बस अपनी जमीन चाहिए। जमीन खरीदने वालों का मानना है कि है कि शासन ने बिल्डर बाजपेयी की कालोनी का लेआउट निरस्त जिस कारण भी किया है मगर जिन भी लोगों के नाम पर पंजीयन है, उन लोगों को शासन के द्वारा नियुक्त किए गए प्रशासकों के माध्यम से जमीन दिलाना चाहिए। यही कारण है कि अपनी जीवन भर की पूंजी को न्यू स्वागत विहार में निवेश करने के बाद भी लोग थाने में एफआईआर या कोर्ट में केस दायर नहीं करना चाहते।