- Hindi News
- पिछली बार गड़बड़ी की, वे फिर जांचेंगे पर्चे
पिछली बार गड़बड़ी की, वे फिर जांचेंगे पर्चे
नगर संवाददाता - रायपुर
माध्यमिक शिक्षा मंडल ((माशिमं)) द्वारा आयोजित परीक्षाओं के पर्चे जांचने में गड़बड़ी करने वाले शिक्षकों को इस साल फिर आंसरशीट जांचने का जिम्मा सौंपा जाएगा। दरअसल माशिमं को पर्चे जांचने के लिए शिक्षक ही नहीं मिल रहे हैं। दूसरा विकल्प नहीं है। ऐसी दशा में उन्हीं शिक्षकों से आंसरशीट जंचवाई जाएगी जो पिछले साल गंभीर गलती कर चुके हैं।
शिक्षकों की गलती के कारण हजारों विद्यार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। शिक्षकों की गलती तब सामने आई थी जब विद्यार्थियों ने अपने नतीजों की हकीकत जानने के लिए पुनर्गणना और पुनर्मूल्यांकन करवाया। कुछ विद्यार्थियों के नंबर एक-एक विषय में 20-20 तक बढ़ गए थे। टॉपर लिस्ट तक बदल गई थी। पर्चे जांचने में इतनी गड़बड़ी सामने आने के बाद माशिमं के अफसरों ने कहा था कि अब पर्चे जांचने में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों को ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा। भविष्य में उनसे पर्चे भी नहीं जंचवाए जाएंगे। अब इस साल परीक्षा करीब आते ही फिर उन्हीं शिक्षकों की सूची बन रही है जिन्होंने पिछले साल पर्चे जांचे थे। अब तक बस नोटिस जारी करने की औपचारिकता
चार साल में गड़बड़ी करने वाले करीब दो हजार मूल्यांकनकर्ताओं में से अब एक के भी खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। सिर्फ नोटिस देकर माशिमं अफसरों ने छुट्टी पा ली थी। यह सिलसिला 2009 से चल रहा है। अभी तक सभी मामलों में माशिमं ने नोटिस देकर खानापूर्ति की है। ऐसे करीब 700 मूल्यांकनकर्ता हैं। इस मामले में माशिमं के उपसचिव यशवंत वर्मा का कहना है कि मूल्यांकनकर्ता के लिए स्कूल से बायोडॉटा मंगवाया जाता है, जितने लोग मापदंड में खरे उतरते हैं उन्हें अलग-अलग जगह मूल्यांकन के कार्य की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। हर साल बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन कार्य में करीब 20 से 25 हजार लोग जुड़ते हैं।
पुनर्मूल्यांकन बना कमाई का जरिया
माशिमं ने पुनर्मूल्यांकन व पुनर्गणना को कमाई का जरिया बना लिया है। हर साल मूल्यांकन से असंतुष्ट होने वाले 25 से 30 हजार छात्र मूल्यांकन के लिए आवेदन करते हैं। पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति विषय 500 रुपए शुल्क लिए जाते हैं। इसके जरिये हर साल माशिमं को तगड़ी कमाई होती है।
ये है आकड़े
सत्र आरोपियों की संख्या
2009-10 542
2010-11 1073
2011-12 435
- चार साल में दो हजार शिक्षकों ने की कॉपी जांचने में गंभीर गलती