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पद्म अवॉर्ड: 7 कैटेगरी में आवेदन ही नहीं आए

7 वर्ष पहले
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आशीष चौकसे रायपुर
कहने को तो राज्य को अब तक 11 पद्मश्री अवार्ड मिल चुके हैं। लेकिन यह अचरज की बात है कि इस बार पद्म अवॉड्र्स के लिए 10 में से महज 3 ही कैटेगरी में नॉमिनेशंस आए थे। इनमें आए कुल 41 नॉमिनेशंस को राज्य सरकार की ओर से पद्म अवॉर्ड के लिए आगे बढ़ाया गया था। इतनी कम कैटेगरी में भेजे गए अवाड्र्स की वजह से ही 26 जनवरी को हुई अवॉड्र्स की घोषणा में छत्तीसगढ़ की झोली में इकलौता ही पद्मश्री अवॉर्ड आ पाया। इन अवाड्र्स में 38 नाम पद्मश्री के लिए तो 2 नाम पद्मविभूषण और 1 नाम पद्मभूषण के लिए भेजा गया था।
इन 3 कैटेगरी से ही आए दावेदार
राज्य से पद्म अवॉड्र्स के लिए नॉमिनेशन महज तीन कैटेगरी से ही गए थे। इनमें पहला शिक्षा एवं साहित्य क्षेत्र था। इस कैटेगरी में 11 नॉमिनेशन आए थे। इसके अंर्तगत एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी कार्य कर रहे शिक्षाविद्, भाषा और साहित्य में काम करने वाले विद्वान और साहित्य, संगीत में काम करने वाले लोग शामिल हैं। जबकि दूसरी कैटेगरी जिसके लिए कुल 17 आवेदन मिले थे, वह है कला, लोककला, रंगमंच, फिल्म क्षेत्र। इसमें रंगकर्मी, कार्टूनिस्ट, बस्तर बैंड से जुड़े लोग शामिल रहे। वहीं आखिरी कैटेगरी जिससे नोमिनेशन मिले थे, वह थी सामाजिक कार्य एवं अन्य क्षेत्र। इसमें 13 नाम आए थे। इस कैटेगरी में इतिहासविद्, सोशलिस्ट आदि शामिल रहे।
यह कैटेगरी रहीं सूनी
पद्म अवॉर्ड की कुल 10 कैटेगरी में से 7 खाली रहीं। इनमें पब्लिक अफेयर्स, साइंस एंड इंजीनियरिंग, ट्रेड एंड इंडस्ट्री, मेडिसिन, सिविल सर्विस, स्पोट्र्स, अदर कैटेगरी शामिल हैं। ऐसा नहीं है कि इनमें से किसी कैटेगरी में कभी कोई राज्य से नॉमिनेट किया ही नहीं गया, बल्कि मेडिसिन ऐसी केटेगरी है, जिसमें 2 बार हमें पद्मश्री मिल चुका है। एक डॉ. एटी डाबके और दूसरे राजनांदगांव के डॉ. बाफना हैं।



यह हैं कुल पद्मश्री

2004 में डॉ. एटी दाबके, मेडिसिन में, 2005 में पूनाराम निषाद को लोककला में, 2006 में डॉ. पुखराज बाफना, मेडिसिन में, 2007 में डॉ. महादेव पांडे, साहित्य में, 2008 में जॉन मार्टिन नैल्सन, आट्र्स में, 2009 में गोविंदराम निर्मलकर, लोककला में, 2010 में डॉ. सुरेंद्र दुबे, साहित्य में, 2012 में दो अवॉर्ड सामाजिक कार्य में फूलबासन बाई व शमशाद बेगम को, 2013 में कबीर बंधुओं को और इस बार यह अनुज शर्मा को मिला है।

यह है पद्मश्री की प्रक्रिया

इसमें सबसे पहले संस्कृति विभाग एक निर्धारित फॉर्म और दावेदारी के साक्ष्य स्वरूप कागजों को लेता है। यह पूरे फॉम्र्स विभागीय टिप्पणी के साथ राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के जरिए सीएम के पास जाता है। यहां से अप्रूव होने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग इसे केंद्र को भेज देता है। केंद्र अपनी स्क्रूटनी के बाद इनम अवाड्र्स की लिस्ट हर गणतंत्र दिवस पर करता है।



राज्य को अब तक सबसे ज्यादा 4 बार कला कैटेगरी में मिला है पद्मश्री पुरस्कार।

यह थे दावेदार

कैटेगरी-नाम

शिक्षा एवं साहित्य क्षेत्र- अनिल कुमार प्रधान, डॉ. दुर्गा पाठक, डॉ. विद्या-विनोद गुप्ता, प्रो. शिवानंद कामड़े, पं. श्यामलाल चतुर्वेदी, डॉ. विनय कुमार पाठक, डॉ. बलदाऊ प्रसाद निर्मलकर, डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा, तुलसीराम महमल्ला, डॉ. रविशंकर व्यास, विनोद कुमार शुक्ल.

कला/लोक कला/ रंगमंच/ फिल्म क्षेत्र- मैथ्यू जहानी जर्जर, डॉ. उग्रसेन कन्नौजे, टीकाराम सारथी, पुरानिक लाल चेलक, राधेश्याम बारले, अमृता बारले, मिलाप दास बंजारे, बाबूलाल प्रजापति, ऊषा बारले, राजकमल नायक, मनोहर दास घृतलहरे, कविता वासनिक, डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर, त्रयंबक शर्मा, मोहन सुंदरानी, राकेश पुजारी, अनूप रंजन पांडे.

सामाजिक कार्य एवं अन्य क्षेत्र- राजेश पटेल, हरि सूरजबली सिन्हा, दुखनाशन प्रधान, मलय कुमार जहानी, राजाराम त्रिपाठी, डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र, डॉ. कौशलेश पांडे, डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर, ब्रह्मकुमारी कमला, डॉ. अशोक हिशीकर, अनुज शर्मा, अमोल दास टंडन, डॉ. आरएस पांडे.

कटेगरी- सबकैटेगरी

पद्म अवॉड्र्स मिलते हैं इन कैटेगरीज में

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पद्म अवॉर्ड को लेकर हर किसी के मन में सम्मान है, बेशक होना चाहिए। लेकिन यह बात आपको आश्चर्य में डाल सकती है कि इन अवॉड्र्स को पाने के लिए छत्तीसगढ़ से सभी १0 कैटेगरी में से सिर्फ ३ में नॉमिनेशन हुआ। नतीजतन ७ कैटेगरी से नॉमिनेशन ही नहीं हुआ।

यूं रहा दावेदारों का हाल

पद्म अवॉड्र्स के लिए दावेदारों की संख्या यूं तो 41 रही, लेकिन यह महज 3 कैटेगरी के अंदर ही थी। जबकि कई महत्वपूर्ण कैटेगरी इसमें ऐसी हैं, जिनमें कोई दावेदार ही नहीं रहे। इनमें सामाजिक कार्य, मेडिसिन, सिविल कंस्ट्रक्शन आदि शामिल हैं। ऐसा नहीं है कि इन कैटेगरी से लोग राज्य में हैं ही नहीं, बल्कि असल वजह जागरूकता की कमी है।



अब तक 11 अवॉर्ड

छत्तीसगढ़ के खाते में अब तक कुल 11 पद्मश्री अवॉर्ड आ चुके हैं। इनकी शुरुआत 2004 में पद्मश्री डॉ. एटी दाबके से हुई थी। उन्हें यह मेडिसिन कैटेगरी में मिला था। मेडिकल कैटेगरी में अब तक दो बार राज्य को पद्मश्री मिल चुका है।

अवेयरनेस की कमी

पद्मश्री के लिए सभी कैटेगरी में कम ही होता है कि दावेदार पर्याप्त आ जाएं। इसकी एक बड़ी वजह कलाकारों में अवेयरनेस का न होना है। इसके लिए राज्य का संस्कृति महकमा प्राप्त दावेदारों की स्क्रीनिंग करके वाया सीएम, जीएडी केंद्रीय संबंधित विभाग को भेज देता है।