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पूछापारा तालाब बना कूड़ादान

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज-!-रायगढ़
शहर के 22 तालाबों में से एक पूछापारा तालाब की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। चार वार्डों के बीच स्थित पूछापारा तालाब टायलेट और कूड़े फेंकने की जगह बन गया है।
इसकी साफ सफाई के लिए किसी वार्ड प्रतिनिधि या नगर पालिक निगम ने पहल नहीं की है। सीएसआर के तहत सौंदर्यीकरण भी नहीं कराया जा सका है। दो साल पहले तालाब के सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी नलवा स्टिल कंपनी को सौंपी गई थी। पूछापारा तालाब वार्ड नं. 5, 6,7, 8 के बीच स्थित है, जहां की एक बड़ी आबादी इस तालाब पर निर्भर है। पांच सालों से तालाब की स्थिति खराब होती जा रही है। लगभग ढाई एकड़ में फैले इस तालाब की स्थिति ऐसी है कि यहां गर्मी के मौसम में पानी बिल्कुल सूख जाता है। इसके कारण यहां के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तालाब की साफ सफाई के लिए लिए किसी वार्ड पार्षद ने पहल नहीं की है।




अनुपयोगी बना तालाब

यहां के लोगों का कहना है कि पूछापारा तालाब की स्थिति पहले बहुत अच्छी थी। चारों वार्डों के लोग द्वारा दशकर्म सहित अन्य कार्यक्रमों के लिए किया जाता था। लेकिन तालाब में पानी नहीं होने के कारण अब ये सारे कार्य बंद हो चुके हैं।



अतिक्रमण को बताया बदहाली का कारण

नलवा स्टिल के अधिकारियों का कहना है कि इस तालाब के चारों तरफ लोगों ने अवैध कब्जा जमा लिया है। जो इस तालाब के विकास में एक बाधा है। इस बाधा को हटाने के लिए पूर्व कलेक्टर से मांग की गई थी, पर उनका तबादला हो गया और अवैध कब्जे को हटाने का मामला अटक गया, ऐसे में तालाब में और सुधार भी नहीं की जा सकी।



तालाब के पास नहीं है लाइट की सुविधा

ढाई एकड़ में फैले इस तालाब के चारों ओर कोई लाईट की व्यवस्था भी नहीं है। तालाब के आसपास बड़ी बड़ी झाडिय़ां उग आई है। इसके कारण शाम होने के साथ ही इस तालाब के आसपास जाना भी कठिन हो गया है। नलवा स्टील के अधिकारियों का कहना है कि जब उन्हें तालाब की जिम्मेदारी दी गई थी तो प्रशासन द्वारा सिर्फ तालाब की गहरीकरण और आसपास के हिस्सों में साफ सफाई की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे कंपनी ने पूरा किया। कंपनी अब इसके देखरेख की जिम्मेदारी नपा निगम और स्थानीय नागरिकों की बता रही है।

क्या कहना है नलवा स्टील कंपनी का

तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए पूर्व कलेक्टर अमित कटारिया ने नलवा स्टील कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी थी। यह सौंदर्यीकरण सीएसआर के तहत किया जाना था। कंपनी के सीएसआर अधिकारी संजीव गर्ग का कहना है कि जब इस तालाब की जिम्मेदारी कंपनी को दी गई थी। तब इस तालाब की स्थिति बहुत ही खराब थी। तालाब के चारों तरफ कच्ची पगडंडीनुमा रास्ते बने हुए थे। कंपनी ने तालाब का गहरीकरण कराया। साथ ही, तालाब के पानी के बहाव को रोकने के लिए चारों तरफ व्यवस्था की। इस सारे कार्यों के लिए कंपनी द्वारा साढ़े आठ लाख खर्च किए।



ठंडी में ही सूखने कगार पर तालाब जिसकी जमीन पर कब्जाकर बना लिए गए कई मकान।