‘भागवत कथा को सुनकर करें आत्मसात’
भास्कर न्यूज - रायगढ़
कोसमनारा में ग्रामीणों द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छष्ठी दिवस व्यासपीठ पर विराजे संत आचार्य अभिनंदन महाराज ने भागवत महापुराण को मोक्ष का मार्ग निरूपित कर श्रीमुख से अमृत वर्षा करते हुए श्रद्धालुओं को जीवन का सार बताया।
श्रीधाम वृंदावन से आए संत ने कोसमनारा़ की पावन धरा पर ग्रामीण भक्तजनों की ओर से श्रीमद् भागवत कथा से महिला, पुरुष संत अभिनंदन महाराज की ओजस्वी वाणी से कथा का रसपान कर रहे है। कथा के प्रारंभ में गीत संगीत व भजन से श्रोतागण झूमने, नाचने और कृष्ण भक्ति में लीन हुए बिना नहीं रहे। कोसमनारा के जागरूक युवक नगेन्द्र नेगी के संयोजकत्व में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवे दिन श्रीकृष्ण मथुरा गमन, कंसवध, उद्धव-गोपी संवाद और रुक्मणी विवाह प्रसंग को सारगर्भित शब्दों में सुनाकर भाव विभोर कर दिया। आचार्य ने कहा कि जहां देवता रहते है वहां राक्षस भी होते है। राजा कंस को पता चल गया था कि श्रीकृष्ण वृंदावन में है कंस को मालूम था कि उसकी मृत्यु श्रीकृष्ण के हाथों होगी। कंस अपने भांजा श्रीकृष्ण को षडय़ंत्र के तहत मथुरा बुलाने के लिए अकरूर को भेजते है। महाराज कंस ने श्रीकृष्ण की हत्या करने के लिए कई तरह के उपाय किए परंतु उन्हें मार न सके। कंस उन्हें मारने के लिए तलवार लेकर दौड़ा श्रीकृष्ण उन्हें छकाते हुए तलवार छिन लिए और कंस के छाती में चढ़कर कंस का वध कर अत्याचार का अंत कर दिया। आचार्य अभिनंदन महाराज ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण कर उसे आत्मसात करने की आवश्यकता है। यह केवल आध्यात्म न होकर जीवन शास्त्र है। उन्होंने कहा कि भगवत 18 पुराणों में सर्वश्रेष्ठ है, जिसकी रचना वेदव्यास ने की है।
श्रीमद् भागवत कथा को सफल बनाने में आयोजन समिति के संयोजक नगेन्द्र नेगी, डिग्री लाल डनसेना, मेदनी प्रकाश नेगी, बाबूलाल पटेल, साहेबराम डनसेना, अनिल डनसेना, सुनिल डनसेना, रामसिंह सिदार, महेन्द्र डनसेना, नीलकमल, एतवार सिंह चौहान, मंगल बंसोड़, नरेन्द्र डनसेना एवं उदल सिदार सहित अनेक सदस्य जुटे रहे।
कोसमनारा में चल रहे भागवत का दृश्य।
झूमने, नाचने एवं श्रीकृष्ण भक्ति में लीन हुए श्रोतागण, कोसमनारा की पावन धरा पर उमड़े भक्तगण