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‘३ अनुवादों में चिरंजीव दास का अनुवाद श्रेष्ठ’

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - रायगढ़

चिरंजीव दास द्वारा संस्कृत ग्रंथों के अनुवाद अतिश्रेष्ठ हैं। मेघदूत के अन्य तीन किए गए अनुवादों को देखें तो चिरंजीव दास का अनुवाद ही सही है। इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि चिरंजीव दास कितने प्रतिभाशाली थे। डॉ. रहस बिहारी द्विवेदी ने उपरोक्त विचार पं. चिरंजीव दास स्मृति व्याख्यानमाला के अंतर्गत व्यक्त किए। श्री द्विवेदी ने कहा कि कहा कि हमारे संस्कृत साहित्य ही हमारे श्रेष्ठ जीवन मूल्यों के प्रेरणा स्त्रोत है। ऋग्वेद रामायण और उपनिषदों उच्चारणों द्वारा हमारे समय की अनेक चुनौतियों का समाधान बताते हुए डॉ. रहस बिहारी द्विवेदी ने कहा कि जीवन मूल्यों की भारतीय भावना वैदिक साहित्य से ही प्रवर्तित होकर लौकिक वाङ्मय तक में परिव्यप्त है। इस अवसर पर उन्होंने चिरंजीव दास पर रचित अपनी पांच संस्कृत छंदों को भी सुनाया। इसके पूर्व 12 वें पं. चिरंजीव दास स्मृति व्याख्यान माला एवं एकलकाव्यपाठ के शुभारंभ सत्र में विख्यात हिन्दी कवि नरेन्द्र जैन, डॉ. रहस बिहारी, द्विवेदी और प्रभात त्रिपाठी ने दीप प्रज्जवलित कर जयंती समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर सर्वप्रथम कवि नरेन्द्र जैन ने अपने कविता संग्रहों चौराहे पर लोहार, दरवाजा खुलता है, सराय में कुछ दिन आदि संग्रहों से अनेक कविताओं का पाठ किया। समकालीन हिन्दी की श्रेष्ठ कविताओं द्वारा उन्होंने श्रोताओं पर एक विशेष प्रभाव छोड़ा। नरेन्द्र जैन के काव्यपाठ से पूर्व वरिष्ठ आलोचक प्रभात त्रिपाठी ने नरेन्द्र जैन की कविताओं पर विचार व्यक्त करते हुए उन्हें अपना प्रिय कवि बताया। ‘‘चिरंजीव दास जयंती समारोह के अंतर्गत 21 जनवरी 2014 को चिरंजीव दास की 93 वीं जयंती पर सर्वप्रथम दो स्कूली छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, तत्पश्चात् आयोजन के संयोजक हरकिशोर दास ने अपना स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।

संस्कृति विभाग तथा छ.ग. संस्कृत विद्यामण्डलम् शासन के सहयोग से प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले संस्कृत और हिन्दी साहित्य पर केन्द्रित इस 12 वें अनुष्ठान की अध्यक्ष जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार शुक्ला ने की। श्री शुक्ला ने चिरंजीव दास को एक बड़ा साहित्यकार बताया और आयोजन के अनुकूल अपनी कुछ काव्य रचनाओं को उन्होंने प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने बहुत सराहा। इस अवसर पर आयोजन के संयोजक हरकिशोर दास ने कार्यक्रम से जुड़ी अनेक चुनौतियों को रेखांकित करते हुए रायगढ़ की साहित्य परंपरा को इसका श्रेय देते हुए कहा कि वही इस आयोजन की सफलता का मूल है। समारोह के अंत में अनिल कुमार शुक्ल ने डॉ. रहस बिहारी द्विवेदी को तथा प्रभात त्रिपाठी ने नरेन्द्र जैन को शाल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में समारोह में चिरंजीव दास पर केन्द्रित स्मारिका ‘‘स्मृति यात्रा’’ का विमोचन भी किया। कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन कवि, लेखक श्याम नारायण श्रीवास्तव ने किया और हरकिशोर दास ने अंत में सभी संबंधितों का आभार जताया।



व्याख्यान को सुनने उपस्थित लोग।





आयोजन - 12 वां चिरंजीव दास स्मृति व्याख्यान माला का समापन