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आरक्षण रोस्टर के चक्कर में अटकी भर्ती प्रक्रिया
भास्कर न्यूज जांजगीर।
नगरपालिका नैला- जांजगीर व चांपा में शिक्षक पंचायत संवर्ग के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आरक्षण रोस्टर 212 का पालन नहीं करने के कारण अटक गई है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
नगरीय निकायों के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए जून 2013 में शिक्षाकर्मी भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन भी किया था। जांजगीर में वर्ग एक के 8, दो के 20 व 3 के 12 पदों के लिए करीब 25 सौ लोगों ने आवेदन किया। इसी प्रकार चांपा नगरपालिका में वर्ग 1 के 17, दो के 20 और तीन के 55 पद व नगर पंचायत सारागांव में रिक्त 33 पदों के लिए भर्ती की जानी है। आवेदक लंबे समय से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। नगरीय निकायों से एक - तीन के अनुपात में प्रस्ताव पारित कर डीईओ के पास अनुमोदन के लिए भेज दी गई है। सूची में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं होने के कारण यहां आकर प्रक्रिया थम गई है।
डीईओ में चल रही जांच
नगरीय निकायों में आवेदन की स्क्रूटनी के बाद 1-3 के अनुपात में सूची जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजी जा चुकी है। डीईओ आफिस में इन दिनों निकायों से प्राप्त सूची की जांच कराई जा रही है। जांच में इस बात का खुलासा हो रहा है कि नगरीय निकायों के द्वारा नए आरक्षण नियम 2012 का पालन नहीं किया जा रहा है। इस नियम में पूर्व में रिजर्व पदों के विरुद्ध भर्ती नहीं होने पर उसे कैरी फॉरवर्ड करने का प्रावधान है। लेकिन निकाय के अधिकारियों ने ऐसा न करते हुए उस पद को ही विलोपित कर नए पदों पर नए लोगों की भर्ती करने के लिए सूची बना दी है। पिछले रिजर्व पद का पोस्ट वैकेंट नहीं बताने के कारण डीईओ सतीष पांडेय ने पूर्व में केटेगरी वाइस नियुक्त शिक्षाकर्मियों की सूची मंगाई है, ताकि पूर्व के रिजर्व पदों की जानकारी मिल सके।
चुनाव भी विलंब का कारण
भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ होने के कुछ दिनों बाद ही अक्टूबर में विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो गई। इसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया पर विराम लग गया। दिसंबर में परिणाम की घोषणा के बाद फिर से प्रक्रिया प्रारंभ हुई है तो आरक्षण रोस्टर ने खेल बिगाड़ दिया है।
आवेदकों को सता रहा डर
शिक्षाकर्मी बनने का सपना देख रहे आवेदकों को विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव का डर सता रहा है। फरवरी के पहले पखवाड़े में जाज्वल्य महोत्सव का आयोजन होगा। इसके बाद अंतिम दिनों में बोर्ड की परीक्षा प्रारंभ हो जाएगी। लोगों का अनुमान है कि अप्रैल माह में फिर से लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है। इस दौरान यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई तो पूरी प्रक्रिया आम चुनाव में फंस जाएगी।
वर्शन
अनुमोदन के लिए नगरीय निकायों से सूची आई है, जिसकी जांच की जा रही है। आरक्षण नियम 2012 के अनुसार उम्मीदवारों का चयन नहीं किया गया है, जिसके कारण पिछली भर्ती की सूची व जाति प्रवर्ग वार रिक्त पदों की जानकारी मंगाई जा रही है।
सतीष पांडेय, डीईओ जांजगीर
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अटैच शिक्षाकर्मियों को स्कूल में उपस्थित होकर देना पड़ेगा प्रमाण पत्र
भास्कर फालोअप
भास्कर न्यूज जांजगीर।
नियम के विरुद्ध स्कूलों को छोड़कर एप्रोच की बदौलत अन्य संस्थाओं में संलग्न शिक्षक पंचायत संवर्ग के खिलाफ कार्रवाई करने जिपं सीईओ ने आदेश जारी किया है। ऐसे शिक्षाकर्मियों को तीन दिन के अंदर मूल शाला में वापस करने और इसके संबंध में गांवों से मूल शाला में उपस्थिति का प्रमाण पत्र जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। गांवों की स्कूलों को छोड़कर विभिन्न शासकीय दफ्तरों में काम करने वाले शिक्षक पंचायत संवर्ग को स्कूल में उपस्थिति का फर्जी प्रमाण पत्र देने वाले सरपंचों पर भी गाज गिर सकती है। यदि यह बात प्रमाणित हो गई कि जिसकी उपस्थिति का प्रमाण पत्र सरपंच या शाला शिक्षा समिति द्वारा दिया जा रहा है वह स्कूल के बजाय अन्य संस्था में कार्य कर रहा है तो ऐसे सरपंच के खिलाफ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बुधवार 22 जनवरी को दैनिक भास्कर ने ‘विद्यालय छोड़कर दफ्तरों में बाबूगिरी कर रहे शिक्षाकर्मी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इस खबर में खुलासा किया गया था कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत स्कूलों में अध्यापन कार्य के लिए नियुक्त शिक्षक पंचायत संवर्ग के लोग स्कूलों के बजाय तहसील कार्यालय, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, साक्षर भारत, कलेक्टोरेट के निर्वाचन शाखा सहित संकुल समन्वयक व बीआरपी जैसे पदों पर काम कर रहे हैं। खबर प्रकाशित होने के बाद जिला पंचायत के सीईओ टामन सिंह सोनवानी ने सभी जनपद पंचायतों के सीईओ, डीईओ और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों की जिला पंचायत में बैठक ली। सीईओ ने सभी अधिकारियों से ऐसे लोगों के अटैचमेंट का कारण पूछा। संतोषजनक व सही जवाब नहीं मिलने के कारण उन्होंने नाराजगी जताई और अटैच शिक्षक पंचायत संवर्ग को तीन दिनों के अंदर उनकी मूल शाला के लिए रिलीव करने का आदेश दिया।
डीईओ का अलग तर्क
डीईओ सतीष पांडेय अटैचमेंट के मामले में अपने विभाग के लोगों के समर्थन में हैं। वे यह तो मानते हैं कि आरटीई के तहत किसी भी शिक्षक पंचायत संवर्ग 1 व 2 से शैक्षणिक कार्य के अलावा दूसरा काम नहीं लिया जा सकता और किसी वर्ग 3 व 2 को किसी अन्य दफ्तर में अटैच करने से पहले कलेक्टर व डीईओ से अनुमति लेना जरूरी है। वहीं वे संकुल समन्वयक व बीआरपी के भी बचाव में हैं। यहां भी वे यह कहना नहीं भूलते कि उन्हें भी अपने नियोक्ता से अनुमति जरूरी है।
फोटो 22 जनवरी को प्रकाशित खबर की स्कैन लगाएं
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॥अनुमोदन के लिए नगरीय निकायों से सूची आई है, जिसकी जांच की जा रही है। आरक्षण नियम 2012 के अनुसार उम्मीदवारों का चयन नहीं किया गया है, जिसके कारण पिछली भर्ती की सूची व जाति प्रवर्ग वार रिक्त पदों की जानकारी मंगाई जा रही है।
सतीष पांडेय, डीईओ जांजगीर
भास्कर न्यूज - जांजगीर
नगरपालिका नैला- जांजगीर व चांपा में शिक्षक पंचायत संवर्ग के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आरक्षण रोस्टर 212 का पालन नहीं करने के कारण अटक गई है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
नगरीय निकायों के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए जून 2013 में शिक्षाकर्मी भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन भी किया था। जांजगीर में वर्ग एक के 8, दो के 20 व 3 के 12 पदों के लिए करीब 25 सौ लोगों ने आवेदन किया। इसी प्रकार चांपा नगरपालिका में वर्ग 1 के 17, दो के 20 और तीन के 55 पद व नगर पंचायत सारागांव में रिक्त 33 पदों के लिए भर्ती की जानी है। आवेदक लंबे समय से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। नगरीय निकायों से एक - तीन के अनुपात में प्रस्ताव पारित कर डीईओ के पास अनुमोदन के लिए भेज दी गई है। सूची में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं होने के कारण यहां आकर प्रक्रिया थम गई है।
आवेदकों को सता रहा डर- शिक्षाकर्मी बनने का सपना देख रहे आवेदकों को विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव का डर सता रहा है। फरवरी के पहले पखवाड़े में जाज्वल्य महोत्सव का आयोजन होगा। इसके बाद अंतिम दिनों में बोर्ड की परीक्षा प्रारंभ हो जाएगी। लोगों का अनुमान है कि अप्रैल माह में फिर से लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है। इस दौरान यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई तो पूरी प्रक्रिया आम चुनाव में फंस जाएगी।
डीईओ आफिस में चल रही जांच - नगरीय निकायों में आवेदन की स्क्रूटनी के बाद 1-3 के अनुपात में सूची जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजी जा चुकी है। डीईओ आफिस में इन दिनों निकायों से प्राप्त सूची की जांच कराई जा रही है। जांच में इस बात का खुलासा हो रहा है कि नगरीय निकायों के द्वारा नए आरक्षण नियम 2012 का पालन नहीं किया जा रहा है।