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- जिनके पास जमीन नहीं उन्होंने ने भी बेचा हजारों क्विंटल धान
जिनके पास जमीन नहीं उन्होंने ने भी बेचा हजारों क्विंटल धान
जगदीश पटेल - रायगढ़
जिले के धान खरीदी केंद्रों में जमकर धांधली चल रही है। खासकर सारंगढ़ ब्लाक स्थित गाताडीह धान खरीदी केंद्र में न सिर्फ ओडीशा का धान खपाया जा रहा है, बल्कि ऐसे किसान भी हजारों क्विंटल धान बेच रहे हैं, जिनके पास एक इंच भी कृषि भूमि नहीं है। कोचिए ओडीशा से धान खरीद कर स्थानीय किसानों की ऋण पुस्तिका लेकर समर्थन मूल्य पर समिति प्रबंधकों की मिलीभगत से बेच रहे हैं, वहीं जिला प्रशासन अंजान बन कर बैठा है। इसका फायदा उठाकर समिति प्रबंधक लाखों रुपए का घपला करने में जुटी हुई है।
ऐसा पहली बार जिले के धान खरीदी केंद्र में नहीं हो रहा है। पिछले वर्ष भी जिला प्रशासन की लापरवाही से करोड़ों रुपए के धान की अफरा-तफरी की गई थी। इसके बाद भी जिला प्रशासन सचेत नहीं हुआ है। जिले में धान की बंपर खरीदी की जा रही है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक जिले के 121 धान खरीदी केंद्रों में 30 लाख क्विंटल से भी अधिक धान की खरीदी हो चुकी है। ऐसा नहीं है कि जिले में धान की पैदावार अधिक हुई, बल्कि पायलिन तूफान और रुक-रुक हुई बारिश की वजह से धान की फसल को बहुत नुकसान भी पहुंचा। किसानों को इस बात की चिंता सता रही थी कि वे धान फसल में किए खर्च राशि को वसूल कैसे करेंगे। अब धान की आवक इतनी ज्यादा हो रही है कि इसको देख कर तो यही लगता है कि जिले में पायलिन और बारिश का असर धान की फसल पर हुआ ही नहीं है। जिस तरह से धान समिति केंद्र खरीद रहे हैं। इससे तो यही लगता है कि जिले में जमकर धांधली चल रही है। कोचिए ओडीशा से धान खरीद कर स्थानीय किसानों को कमीशन देकर उनकी ऋण पुस्तिका के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान समिति प्रबंधकों की साठगांठ से बेच रहे हैं। इसमें समिति प्रबंधक व फड़ प्रभारियों की भी मिलीभगत है। खासकर यह गोरखधंधा जिले के सारंगढ़ ब्लाक स्थित गाताडीह समिति केंद्र में चल रहा है। दैनिक भास्कर ने जब इसका पड़ताल किया तो गांव के ही कुछ किसानों ने बताया है कि दर्जनों ऐसे किसानों है जिनके पास फूटी कौड़ी कृषि भूमि नहीं है। इसके बाद
भी उनके द्वारा हजारों क्विंटल धान बेचा गया है।
इन किसानों के द्वारा बेचे गए धान संदेह के घेरे में- धान खरीदी केंद्र गाताडीह में अरविंद नामक किसान ने 1 हजार 290 क्विंटल धान बेचा है। उक्त किसान के पास करीब 51 एकड़ कृषि भूमि होनी चाहिए, लेकिन गांव के अन्य किसानों ने बताया कि उसके पास इसकी आधी भी जमीन नहीं है। कृपा राम ने 185 क्विंटल, गंगाराम ने 365 क्विंटल, गुहालाल ने 850 क्विंटल, घसिया नामक किसान के द्वारा 390 क्विंटल, चतुर सिंह 480 क्विंटल, तुकाराम 560 क्विंटल, डूगराम 640 क्विंटल, जोतराम के नाम 272 क्विंटल, टुकेश्वर 300 क्विंटल, तीजेंद्र कुमार 670 क्विंटल, तीजराम 550 क्विंटल, धनीराम 955 क्विंटल, नान्हूराम 530 क्विंटल समिति केंद्र के द्वारा धान खरीदी इन किसानों का किया गया है।
इसलिए जरूरी है जांच- कृषि विभाग के अधिकारियों की माने तो किसी भी खेत में एकड़ में अधिकतम 25 क्विंटल धान की पैदावार की जा सकती है। इस मान से अगर इस क्षेत्र के 4 हजार एकड़ में पैदावार की गणना करें तो धान की फसल 1 लाख क्विंटल होती है। अगर किसान हाइब्रिड धान का उपयोग करते हुए उन्नत तकनीक से भी धान की खेती करें तो आंकड़ा 1 लाख 20 हजार क्विंटल के आसपास पहुंचता है। लेकिन यहां तो आंकड़ा 2 लाख 70 हजार क्विंटल तक जा पहुंचा है। साथ ही कृषि विभाग के अधिकारियों का यह भी कहना है कि अगर बारिश और मौसम किसानों का साथ देता है, तब ही इतनी धान की फसल उगाई जा सकती है, लेकिन इस वर्ष ओडीशा और आंध्र प्रदेश में आई पाइलिन तूफान का असर सारंगढ़ और बरमकेला क्षेत्र में ही सबसे अधिक पड़ा है। इसके बाद भी इस क्षेत्र के धान खरीदी केंद्रों में सबसे ज्यादा खरीदी की जा रही है। इसलिए गाताडीह समिति केंद्र में किसानों के द्वारा बेचे गए धान की जांच करना जरूरी है।
प्रति वर्ष 30 लाख रुपए करते हैं अंदर
एक पूर्व समिति प्रबंधक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रति वर्ष समिति प्रबंधक इस खेल में करीब 30 से 40 लाख रुपए कोचियों और ओडीशा की धान खरीद कर अंदर करते हैं। जिस किसान के नाम से ऋण पुस्तिका से धान बेचा जाता है। उसका ऋण पुस्तिका समिति प्रबंधक ही रखते हैं। इसमें कुछ प्रतिशत किसानों को कमीशन देने के अलावा कोचियों व प्रबंधक बाकी रुपए अपने पास रखते हैं। इसमें कुछ हिस्सा जिला प्रशासन के अधिकारियों का भी होने का आरोप है।
ओडीशा का धान खप रहा
ओडीशा सीमा से लगे रायगढ़ जिले के सारंगढ़ ब्लाक में धान खरीदी में जमकर गड़बडिय़ां हो रही हैं। यहां छग के साथ-साथ ओडीशा का धान भी धड़ल्ले से खपाया जा रहा है। इसकी वजह ओडीशा में छत्तीसगढ़ की तुलना में धान खरीदी की दर कम होने के साथ सरकार किसानों को बोनस भी नहीं देती है। धान पर मिलने वाली इस बोनस का फायदा उठाने के लिए जिले के सीमावर्ती इलाकों में दीगर प्रांतों के धान को खपाने का खेल खेला जा रहा है। इसमें कोचियों के साथ समिति प्रबंधक और जिला प्रशासन के कुछ अधिकारियों की भी मिलीभगत है।
न चेक पोस्ट न बैरियर
ओडीशा से रायगढ़ जिले में प्रवेश करने के लिए एक नहीं आधा दर्जन रास्ते हैं। इसमें सरिया होते हुए बरमकेला के साथ डोंगरीपाली होते हुए बरमकेला, सारंगढ़ के धान खरीदी केंद्रों में पहुंचता है। साथ ही पुसौर सूरजपुर पुल होते हुए नवा पाली के रास्ते ही कई समिति केंद्र में ओडीशा का धान पहुंच जाता है। इन रास्तों में न तो चेक पोस्ट है न ही बैरियर है। कुछ स्थानों पर बैरियर व चेक पोस्ट है। लेकिन वहां धान से लोड वाहनों की जांच ही नहीं होती है। इसकी वजह से आसानी से ओडीशा का धान जिले के धान खरीदी केंद्र में खपा दिया जाता है।
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले तीन सालों में सारंगढ़ विकासखंड के ग्राम गाताडीह के साथ आसपास के दर्जनों गांवों में कृषि भूमि की रकबा नहीं बढ़ी है। लगभग 4 हजार एकड़ ही कृषि भूमि में धान की पैदावार की जा रही है। इसके बाद भी इस समिति केंद्र में पिछले तीन वर्ष में लगातार धान की आवक बढ़ी है। विपणन विभाग से मिली आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2010-11 समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 80 हजार क्विंटल धान खरीदा गया तो वहीं वर्ष 2011-12 में एक लाख 40 हजार क्विंटल की धान खरीदी हुई। वर्ष 2012-13 में 2 लाख 70 हजार क्विंटल खरीदा गया। इस वर्ष वर्तमान में गाताडीह समिति केंद्र में करीब डेढ़ लाख क्विंटल की खरीदी की जा चुकी है। जबकि वर्तमान में खरीदी जारी है। माना जा रहा है कि 3 लाख क्विंटल खरीदी हो सकती है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि अगर कृषि भूमि की रकबा नहीं बढ़ रही है तो इतनी मात्रा में धान की उपज कैसे हो रही है।
नहीं बढ़ा कृषि का रकबा, खरीदी तीन गुना बढ़ी