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छात्रावासों की व्यवस्था सुधारने का जिम्मा अब नए विधायकों पर

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - रायगढ़
अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा संचालित छात्रावास आश्रमों में जिला स्तरीय निगरानी समिति का पुनर्गठन करते हुए इसमें नवनियुक्त विधायकों को शामिल किया गया है। कलेक्टर बंसल ने आश्रम छात्रावास के लिए जिला स्तरीय निगरानी एवं परामर्शदात्री समिति का पुनर्गठन किया गया है। समिति के अध्यक्ष कलेक्टर होंगे।
सांसद, विधायकों और विभिन्न अधिकारियों को सदस्य और आदिवासी विकास के सहायक आयुक्त को सदस्य सचिव बनाया गया है। जिला स्तरीय निगरानी एवं परामर्शदात्री समिति का पुनर्गठन किया गया है। समिति में कलेक्टर अध्यक्ष, सांसद रायगढ़ विष्णुदेव साय अथवा उनके द्वारा मनोनीत प्रतिनिधि जिला पंचायत रायगढ़ की शिक्षा स्थायी समिति के सभापति जिले के निर्वाचित अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के विधायक या उनके द्वारा मनोनीत प्रतिनिधि अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र लैलूंगा के विधायक सुनीति राठिया, सारंगढ़ के विधायक केराबाई मनहर और धरमजयगढ़ विधायक लालजीत सिंह राठिया को सदस्य बनाया गया है। इसी प्रकार समिति में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रायगढ़, जिला खाद्य अधिकारी, सहायक संचालक शिक्षा दीप्ति अग्रवाल, गवर्नमेंट गल्र्स स्कूल गोढ़ी के प्राचार्य मैथिली बारिक, जिला पंचायत सदस्य शांति पैकरा पति श्री लखन लाल पैकरा, ग्राम-राजपुर विकासखंड लैलूंगा, छबिला चौहान, परमेश्वर चौहान को सदस्य बनाया गया है और आदिवासी विकास के सहायक आयुक्त को इस समिति के सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति को निर्धारित कार्य के अनुसार संस्था में प्रवेशित विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति की मॉनिटरिंग करते हुए सुधार के लिए सुझाव, सहयोग, संस्था के लिए निर्धारित समय-सारिणी का पालन सुनिश्चित करना। संस्था में उपलब्ध सुविधाओं पेयजल, विद्युत एवं विविध सामग्री छात्रहित में उपयोग की समीक्षा, शिष्यवृत्ति भुगतान और विद्यार्थियों के लिए संचालित मेस का समय-समय पर निरीक्षण एवं सुधार के लिए प्रयास, छात्रावास परिसर में स्वच्छतापूर्ण वातावरण, छात्रों के व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के स्तर की समीक्षा एवं सुधार के लिए सुझाव, छात्रावास आश्रम के संचालित विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा, छात्रावास में विद्यार्थियों के शैक्षणिक गुणवत्ता की समीक्षा एवं सुधार के लिए सुझाव, उपरोक्तानुसार गठित समितियों में जनप्रतिनिधि, समिति के गठन तिथि से 3 वर्ष की अवधि तक समिति के अध्यक्ष, सदस्य कार्यरत रह सकेंगे।

, किंतु उपरोक्त अवधि के पूर्व उनके संवैधानिक पद कार्यकाल समाप्त होने की स्थिति में उक्त तिथि से समिति के अध्यक्ष, सदस्य पद की सदस्यता भी समाप्त मानी जाएगी।