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कोल-बाक्साइट साइडिंग बंद करें

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - गौरेला

रेलवे स्टेशन के सामने दो माह पहले खोले गए कोल साइडिंग को विरोध के बावजूद रेलवे ने बंद नहीं किया गया है। इससे आक्रोशित युवक कांग्रेस व नागरिक संघर्ष समिति ने कोल साइडिंग के साथ बाक्साइट की साइडिंग बंद करने की मांग की।

पेण्ड्रारोड स्टेशन के सामने खोले गए कोल साइडिंग का प्रस्ताव के समय से ही विरोध हो रहा है। लोगों का कहना है इससे यहां का पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। इसका लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। आबादी के बीच से कोयले से भरे वाहनों के परिवहन से सड़कें भी खस्ताहाल हो जाएंगी।

सोमवार को पेण्ड्रारोड आए रेलवे डीआरएम अजय प्रताप सिंह से पेण्ड्रा रोड रेलवे रेस्ट हाउस में युकां प्रदेश अध्यक्ष उत्तम वासुदेव व नागरिक संघर्ष समिति के आशीष गुप्ता, मनीष दुबे, अमोल पाठक, रामप्रकाश ठाकुर, घनश्याम ठाकुर, मुकेश दुबे,अशोक सोनी, समीर आईच, गोविंद अग्रवाल, राकेश अग्रवाल ने कोल साइडिंग को हटाने के संबंध में अपना पक्ष रखा। युकां का कहना था कि कोल साइडिंग नहीं हटाने पर रेल रोको आंदोलन किया जाएगा।

पर्यावरण विभाग की भी अनुमति नहीं-पत्रकारों ने डीआरएम से जानना चाहा कि क्या रेल प्रशासन ने कोल साइडिंग खोलने से पहले पर्यावरण विभाग से अनुमति ली है। इस पर उनका कहना था रेलवे को अनुमति की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कोयला ठेकेदार के प्रतिनिधि से संबंध में पूछताछ की तो पता चला कि उसने पर्यावरण विभाग से अनुमति नहीं ली है। इसके बाद वे यह कहते नजर आए कि यदि ठेकेदार मौके पर जालीदार फेंसिंग लगा देता है और स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव करता है तो पर्यावरण प्रदूषण रोका जा सकता है। उन्होंने कोल बाक्साइट ठेकेदार के प्रतिनिधियों से इस विकल्प पर भी चर्चा की कि क्या वे यहां से 8 किमी दूर चुकतीपानी तक खुद के खर्च से रेल लाइन बिछाकर वहां साइडिंग बनाकर इसका परिवहन कर सकते हैं। इस पर दोनों प्रतिनिधियों ने असमर्थता जताई। डीआरएम के बार बार ठेकेदारों के पक्ष में बात करने से संघर्ष समिति के लोग आक्रोशित हो गए और चेतावनी देकर बाहर आ गए कि वे किसी भी कीमत में यहां कोल व बाक्साइट की साइडिंग बर्दाश्त नहीं करेंगे।

बंद कमरे में चर्चा: इससे पहले डीआरएम रेल कर्मियों के साथ विश्राम गृह पहुंचे। यहां उनकी अजीत जोगी से बंद कमरे में काफी देर चर्चा हुई। बाहर निकलने पर उन्होंने इसे अनौपचारिक भेंट बताते हुए कोल साइडिंग के संबंध में किसी चर्चा से इनकार किया।

रेलवे को पर्यावरण नियमों व मानकों की जरूरत नहीं बताने के डीआरएम के जवाब पर स्थानीय लोगों का कहना था रेलवे को पर्यावरण प्रदूषण की छूट है? या पर्यावरण विभाग का कानून रेलवे पर लागू नहीं होता। वहीं पर्यावरण विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है क्योंकि वह इस मामले में अब तक खामोश है।

न्यायालय जाने की तैयारी-कोल साइडिंग को लेकर रेलवे के उदासीन रवैये के खिलाफनागरिक संघर्ष समिति न्यायालय जाने की तैयारी में है। इसके लिए कानूनविदों से मार्गदर्शन लिया जा रहा है।







विरोध - डीआरएम से युकां व नागरिक संघर्ष समिति की मांग