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मुड़मिसनी और धनवारा एनीकट की होगी जांच

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज -!-कोरबा
जल संसाधन विभाग के पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक में निर्माणाधीन मुड़मिसनी व धनवारा एनीकट सह पुलिया के फायनल करने के मामले की जांच कराई जाएगी। कलेक्टर रजत कुमार ने विभाग को रिकार्ड मांगा है। दोनों ही एनीकट के निर्माण में अब तक 1 करोड़ ९२ लाख रुपए से अधिक का भुगतान कर दिया गया है। नुकसान होता देख ठेकेदार ने ग्राम पंचायत व वन विभाग की आपत्ति बताकर फायनल करा लिया। इस मामले में अधीक्षण अभियंता व कार्यपालन अभियंता फंसते नजर आ रहे हैं। दोनों ही अधिकारियों ने बिना वस्तुस्थिति की जानकारी लिए बिना ही फायनल कर दिया।
दैनिक भास्कर ने ६ जनवरी के अंक में सिंचाई विभाग के ईई की लापरवाही से एनीकट का निर्माण पड़ा खटाई में व ७ जनवरी को आधे अधूरे काम का 1 करोड़ ९२ लाख भुगतान शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसे कलेक्टर रजत कुमार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने सिंचाई विभाग के ईई राजेश धवनकर को निर्माण कार्यों का रिकार्ड प्रस्तुत करने कहा है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। राज्य शासन ने वर्ष २०११ में मुड़मिसनी एनीकट सह पुलिया निर्माण के लिए ४४०.२२ लाख व धनवारा एनीकट सह पुलिया निर्माण के लिए ४०६.५२ लाख की प्रशासकीय मंजूरी दी थी। लेकिन ठेका ४२.६ प्रतिशत कम में दे दिया गया। इससे मुड़मिसनी की लागत २०१.४५ लाख व धनवारा की लागत १८५.५९ लाख हो गई। दोनों ही एनीकट के लिए अब तक 1 करोड़ ९२ लाख से अधिक का भुगतान कर दिया गया है। अभी भी मौके पर बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री रखा हुआ है। लेकिन अधिकारियों ने मिलकर फायनल कराने बहाना बनाया। इसके लिए ग्राम पंचायत मेरई की सरपंच श्रीमती रमला बाई नेटी व वन विभाग से यह लिखा लिया कि सड़क निर्माण कराने तक सामग्री जाने नहीं दिया जाएगा। अगर सरपंच या वन विभाग को आपत्ति रहता तो अभी तक वहां निर्माण ही
शुरू नहीं हो पाता। मौके पर कांक्रीट वाल बनाकर छोड़ दिया गया है। विभाग के अधिकारियों ने सरपंच या वन विभाग से इस संबंध में चर्चा तक नहीं की। बल्कि मिलीभगत कर काम फायनल करा लिया। इसकी जांच कराने पर बड़ा खुलासा हो सकता है।


इसी तरह कई जलाशयों व एनीकट के निर्माण में भी भुगतान किया गया है।



एसई ने नहीं देखा स्थल

जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता बिलासपुर बीडी वैष्णव का कहना है कि फारेस्ट एरिया में कार्य होने के कारण आपत्ति आ रही थी। अभी तक वस्तुस्थिति लेने मौके पर नहीं जा पाया हंू। वहां जाने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि क्या स्थिति है। इससे साफ है कि अधिकारियों ने बिना गंभीरता दिखाए ही ठेका का फायनल कर दिया।