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रैक पाइंट बन गया कोल साइडिंगचार साल पहले अनाज रखने के लिए किया गया था निर्माण, एफसीआई की लापरवाही से रेलवे ने कोयला के लिए दे दिया।

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जांजगीर।
जांजगीर- नैला रेलवे स्टेशन से अनाज बाहर भेजने व मंगाने के लिए करीब चार साल पहले लाखों रुपए खर्च कर के रैक पाइंट बनवाया गया था। एफसीआई ने यहां से राशन सामग्री परिवहन करने के लिए रुचि नहीं दिखाई जिसके कारण रेलवे द्वारा रैक प्वाइंट को कोयला साइडिंग बना दिया गया है। जिला मुख्यालय में एफसीआई का गोदाम है।
यहां पीडीएस के लिए राशन सामग्री गेहूं, चावल, शक्कर आदि बाहर से आता है। इसके अलावा कस्टम मिलिंग का चावल भी यहां से भेजा जाता है। पूर्व में नैला में माल गोदाम था यहां सामग्री रखी जाती थी। लेकिन वह पुराना हो गया था। इसे तोड़कर रेलवे क्रासिंग के उस पार रैक पाइंट रेलवे द्वारा बनवाया गया था ताकि सामग्री का परिवहन हो सके। लेकिन एफसीआई के तत्कालीन अधिकारियों ने रैक प्वाइंट से माल भेजने में रुचि नहीं दिखाई। तीन साल तक अनुपयोगी होने के कारण आखिरकार रेलवे ने इस रैक प्वांइट को कोयला साइडिंग में बदल दिया। अब इस जगह से राशन सामग्री की जगह कोयला का परिवहन होता है। एफसीआई के अधिकारियों की गैरजिम्मेदारी से जिला मुख्यालय में रैक प्वाइंट नहीं खुल पाया है।




रैक पाइंट बना कोल साइडिंग

नैला कोयला साइडिंग में कोयला लोड करते लोडर



क्या दिया गया

था तर्क

नैला रेक पाइंट से माल नहीं भेजने के पीछे तर्क दिया गया था कि रैक पाइंट की चौड़ाई कम होने के कारण वहां पर्याप्त ट्रक खड़े नहीं हो सकते और हो भी गए तो माल भरकर वाहनों को मोड़ा नहीं जा सकता। इस कारण वहां नया रैक पाइंट आकार नहीं ले पाया।



कई लोडर चलते हैं एक साथ

जिस स्थान को एफसीआई के अधिकारियों ने छोटा बताया था उसी स्थान पर सैकड़ों ट्रक कोयला डंप हो रहा है और दर्जनों लोडर एक साथ मालगाड़ी में कोयला लोड करते हैं। साइडिंग में डंप कोयला को चार लोडर द्वारा एक साथ भरा जा रहा है। जब कोयला डंप करने व लोड करने के लिए पर्याप्त जगह है तो फिर एफसीआई के अधिकारियों का तर्क गले नहीं उतरता।

॥रेलवे ने व्यवसाय करने के लिए गुड्स शेड बनवाया था। एफसीआई के अधिकारियों ने रैक पाइंट के लिए ध्यान नहीं दिया। इसलिए रेलवे ने कोयला साइडिंग बना दिया है।ञ्जञ्ज

एस. बनर्जी, मुख्य स्टेशन मास्टर जांजगीर- नैला

नैला कोयला साइडिंग में कोयला लोड करते लोडर