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संरक्षित वन भूमि पर हो रहा अतिक्रमणनगर पंचायत एवं वन विभाग दे रहे अतिक्रमण को बढ़ावा

8 वर्ष पहले
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कुनकुरी। नगर पंचायत का अतिक्रमण को लेकर दोहरा मापदंड अपनाने का मामला सामने आया है। एक ओर शहर के अंदर नगर पंचायत के अधिकारी चूना लेकर अतिक्रमण हटाने का बिगुल बजा रहे है तो वही दूसरी ओर वन भूमि पर अतिक्रमण को स्थाई करने के लिए खुद ही वन अधिनियम का खुला उल्लंघन कर रहे है।

मामला नगर के संशोधित वार्ड क्रमांक 15 क्रुसटोंगरी, दर्रीटोली का है, जो है तो वन भूमि में लेकिन राजनैतिक लाभ के चक्कर में यहां मकान बनाकर रहने वालों को नगर पंचायत का निवासी बना दिया गया है।

जब वर्षों से काबिज गरीब तबका वन भूमि का पट्टा मांगता है तो नगर पंचायत क्षेत्र बताकर पट्टा नहीं मिलने की बात बता दी जाती है। जब नगर पंचायत अधिकारी इंजीनियर को कमाई की याद आती है तो इसी वन भूमि को चारागाह बनाने के लिये नियमों की अनदेखी करते है।

संरक्षित वन क्षेत्र क्रमांक पीएफ1200 की वन भूमि में नपं ने कुछ माह पहले ही 13 लाख की लागत से सीसी रोड और पांच लाख की लागत से वाटर सप्लाई टंकी का निर्माण करा दिया जिसके लिए वन विभाग को न तो सूचित किया गया और न ही विभाग से अनुमति ली गई। नपं के सीएमओ एसआर चौहान से इस संबंध में जानकारी लेने पर उन्होंने इंजीनियर व्हीके मिश्रा से सलाह लेकर बताया कि प्रचलित मार्ग होने के कारण क्रुसटोंगरी और दर्रीटोली निवासियों की सुविधा के लिये सीसी रोड बनाया गया है और पेयजल के लिए टंकी निर्माण कर सुविधा दी गई है।

वन विभाग से अनुमति लिये जाने के सवाल को जनहित के बात कहते हुए टाल दिया। उल्लेखनीय है की नगर पंचायत की मनोनीत संचालन समिति के संक्षिप्त कार्यकाल में अधिक से अधिक निर्माण कार्य कराने की आपाधापी में नगर पंचायत द्वारा वैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन करते हुए अपनी योजनाओं को अंजाम देने में लगे हुए है।अतिक्रमण प्रभावित इन क्षेत्रों में 10 लाख रुपए की सड़क चौड़ीकरण व गार्ड वाल के साथ बस्ती में बिजली खंभे लगाने के प्रस्ताव की जानकारी भी प्राप्त हुई है।

ऐसे में वन अधिनियम का खुला उल्लंघन मनमर्जी करने के मामले में वन विभाग भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है। लोगों में चर्चा है कि वन विभाग के अधिकारी अपनी नौकरी खतरे में डालने से बचने के लिए वन भूमि पर नगर पंचायत के अतिक्रमण को नजर अंदाज कर रहे है।


वनक्षेत्र भूमि जहां बनाया जा रहा है मकान

संरक्षित वन में हुए अतिक्रमण के अन्तर्गत बने सैकड़ों मकानों में लगे विद्युत कनेक्शन भी विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते है साधारण नागरिक को नए विद्युत कनेक्शन के लिये अनेक प्रकार के दस्तावेज जिनमें निवास का प्रमाण, पहचान का प्रमाण, भूमि के स्वामित्व का प्रमाण, आदि से संबंधित प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करने पर भी अनेक प्रकार के पापड़ बेलने पड़ते है।

इन अवैध बस्तियों में विद्युत कनेक्शन देने नागरिक सुविधाएं पेयजल सड़क आदि उपलब्ध कराने के लिये संबंधित विभागों एवं एजेंसियों में होड़ लगी है संबंधित विभागों के अधिकारी इन विषयों पर सीधा सीधा जवाब देने से बचना चाह रहे है। इस सारे खेल के पीछे राजनैतिक दबाव, निर्माण कार्यों के द्वारा अवैध कमाई का लालच, महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। इन सारे असंवैधानिक कार्यों को जन सुविधा का लबादा ओढ़ाया जा रहा है। संबंधित विभाग द्वारा कार्यवाही न किए जाने से अतिक्रमण का नया प्रयास निरंतर जारी है।

मनमानी तरीके से हो रहा अतिक्रमण

नगर पंचायत के द्वारा वन भूमि पर निर्माण के लिए विभाग से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई और न ही सूचना दी गई है। मामला गंभीर हैं इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को देकर मार्गदर्शन लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यूके सिंह, वन परिक्षेत्राधिकारी कुनकुरी