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हाथियों के प्रजनन के लिए अनुकूल है जिले का वातावरण
भास्कर न्यूज - जशपुरनगर
नगर की हरी-भरी वादियां हाथियों के रहवास के लिए अनुकूल है। हाथियों को प्रजनन के लिए भी यहां की जलवायु और क्षेत्र रास आ रहा है। बीते 8 सालों में जिले के जंगलों में हाथियों के 27 शावकों ने जन्म लिया। जशपुर जिले में 1988 में मनोरा विकासखंड के ग्राम लुखी मधुवा, जशपुर के ग्राम टेकुल में झारखंड से प्रवासी हाथियों के आने का सिलसिला शुरू हुआ था। 1988 में जब पहली बार हाथी जिले में प्रवेश किए थे, उस वक्त उनकी संख्या 18 थी।
वहीं जिले के दूसरे छोर फरसाबहार के ग्राम पेरवांआरा, घुमरा और जबला में ओडि़शा की ओर हाथियों ने दस्तक देना शुरू किया। इन हाथियों की संख्या 14 थी। उस समय इस क्षेत्र के लोगों को हाथियों के साथ रहने और उनके साथ संघर्ष का अनुभव नहीं होने के कारण काफी परेशानी हो रही थी। उसी दौरान राज्य सरकार ने कर्नाटक से एक दल को इन हाथियों को पकडऩे के लिए बुलवाया। मनोरा के नजदीक सोगड़ा में इन हाथियों को पालतू हाथियों की मदद से पकडऩे में सफलता मिली। पकड़े गए हाथी मध्यप्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों में सैलानियों को घुमाने का काम कर रहे हैं। जशपुर जिले का नैसर्गिक वातावरण, ऊंची-ऊंची पहाडिय़ा, जंगल में पर्याप्त चारा, बारहमासी नदी-नाले हाथियों को अनुकूल आवास उपलब्ध कराते हैं। खासकर के बादलखोल अभ्यारण्य और मनोरा क्षेत्र के जंगल में बारहों माह हाथी अपनी उपस्थित दर्ज कराते रहते हैं।
हाथियों को प्रजनन के लिए भी ऐसी जगह चाहिए, जहां पानी की उपलब्धता हो। घने जंगल के साथ थोड़ी समतल और नमी वाली जगह हो। ऐसी कई जगह जिले के जंगल में हैं। जिसका उपयोग हाथी शावकों को जन्म देने में करते हैं।
दो सालों में जन्मे 5 शावक
जिले के जंगलों में हाथी के शावकों के जन्म लेने का सिलसिला 2005 में प्रारंभ हुआ। उस समय जिले में 22 हाथियों का दल मौजूद था। उस वक्त 2 शावकों ने जन्म लिया था। 2007 में 28 हाथी थे और 3 शावकों ने जन्म लिया। 2008 में 28 हाथी का दल था और 3 ने जन्म लिया। 2009 में जहां 30 हाथियों का दल मौजूद था। वही उस साल 5 शावकों ने जन्म लिया। 2010 में 45 हाथियों का दल वर्षभर मौजूद रहा। जिन्होंने 7 शावकों को जन्म दिया। 2011 में 2, 2012 में 3 एवं 2013 में 2 शावकों का जन्म हुआ। हालांकि वन विभाग के पास इसकी अलग से कोई रिपोर्टिंग नहीं होती है। यह ग्रामीणों की सूचनाओं पर ही आधारित होती है।
॥जिले का वातावरण व भौगोलिक क्षेत्र शावकों को जन्म देने के लिए अनुकूल है। 2011 की गणना में 2 से 10 साल की उम्र वाले 11 हाथी थे। हाथी लगातार माइग्रेट होते रहते हैं।ञ्जञ्ज
के माचियो, डीएफओ
पूरे देश में हुई थी एक साथ गणना
देश में पहली बार हाथियों के लिए अलग से गणना 2011 में हुई थी। उस वक्त हाथियों की सही संख्या का आंकड़ा एकत्र करने के लिए 8, 9 एवं 10 जून को एक साथ देश के सभी हिस्सों में हाथियों की गिनती की गई थी। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2011 में जिले में 15 नर, 32 मादा एवं 2 से 10 साल के 11 शावक मिले थे। नवजात शिशुओं की संख्या निरंक थी। उसके बाद जिले में कितने हाथी हैं, इसकी सही-सही गणना करना मुश्किल है। क्योंकि हाथी एक ही दिन या रात में कई किलोमीटर का सफर कर एक जिले से दूसरे जिले चले जाते हैं। एक स्थान से दूसरे स्थान आना-जाना लगा रहता है।