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निकलो ना बेनकाब जमाना खराब है...पंकज उदास

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जांजगीर
नगर में शुक्रवार की रात गजल गायक पंकज उधास ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उन्होंने एक से बढ़कर एक गजल सुनाए और खूब समां बांधा। श्रोता भी बड़ी संख्या में देर रात तक पंकज उधास को देखने और सुनने के लिए कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे। निकलो न बेनकाब जमाना खराब है...
गजल सुनाकर पंकज उधास ने सुरों से सजी शाम का समापन किया। पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष लीलाधर सुल्तानिया के पारिवारिक कार्यक्रम के अपनी प्रस्तुति देने मुंबई से गजल गायक पंकज उधास नगर में पहुंचे थे। उनको देखने और सुनने के लिए बड़ी संख्या में नगरवासी भी पहुंचे। गजल में अपनी विशेष पहचान बना चुके पंकज उधास ने मशहूर गजलों की एक- एक कर प्रस्तुति दी। ना कजरे की धार ना मोतियों के हार... जिएं तो जिएं कैसे बिन आपके... हुई महंगी बहुत ही शराब कि थोड़ी- थोड़ी पिया करो... जैसे अपने सदाबहार नगमें सुनाकर श्रोताओं को गदगद किया। फिल्म नाम का मशहूर गीत ‘चिट्ठी आई है ’ की खूब फरमाइश हुई। पंकज उधास ने भी यह गजल कई बार सुनाई। निकलो ना बेनकाब जमाना खराब है... गजल के साथ सुरमयी शाम का समापन रात 12 बजे हुआ। पंकज उधास को रूबरू देखने और सुनने के लिए नगर समेत जिलेभर से खास और आम लोग पहुंचे थे। सांसद कमला देवी पाटले, विधायक मोतीलाल देवांगन, अंबेश जांगड़े, चुन्नीलाल साहू और पूर्व विधायक नारायण चंदेल भी कार्यक्रम समाप्त होते तक डटे रहे।



गजल प्रस्तुत करते पंकज उधास

नई पीढ़ी को धैर्य की जरूरत

करोड़ों दिलों की धड़कन पंकज उधास ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि इन दिनों संगीत परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इसमें नए- नए प्रयोग किए जा रहे हैं। एक तरह से कहें तो हाईफाई म्युजिक का दौर चल रहा है। इस दौर के संगीत के बारे में पंकज का कहना है कि भारतीय संगीत में यह एक गिरावट है इसमें न सुर है न शायरी। उन्होंने नई पीढ़ी के प्रति चिंता जताते हुए कहा कि संगीत के क्षेत्र में जो नई पीढ़ी आ रही है उनमें धर्य की कमी है। उनका मानना है कि नई पीढ़ी को बड़े कलाकारों से प्रेरणा लेनी चाहिए। बेगम अख्तर को पंकज उधास ने अपना प्रेरणा स्त्रोत बताया। उन्होंने अपने जिंदगी में अनुभव के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस लंबी कहानी के लिए उन्होंने एक पुस्तक लिखी है जो जल्द ही उनके चाहने वालों के लिए उपलब्ध होगी

गजल गायक पंकज उधास ने देर रात तक बांधा समां, अजीम फनकार ने सुनाए एक से बढ़कर एक गजल