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लंबा होता जा रहा बाइपास का इंतजार

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जांजगीर
जिला मुख्यालय की मुख्य सड़क में यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए शहर के बाहर पुटपुरा के पास से धाराशिव, पीथमपुर होते हुए बाइपास सड़क बनाने की घोषणा सीएम द्वारा की गई थी। अब तक इस दिशा में काम शुरू नहीं हो पाने से यह घोषणा थोथी साबित हो रही है। सीएम द्वारा सार्वजनिक मंच पर की गई घोषणा के लिए विभाग के आला अधिकारी संजीदा नहीं है तभी तो बाइपास निर्माण संबंधी फाइल भी इंच भर नहीं सरक पाई है।
जिला मुख्यालय के बीच से ही नेशनल हाईवे 49 गुजरा है। यह कोरबा, रायगढ़, ओडिशा जाने के लिए प्रमुख मार्ग है। जिसके कारण इस रोड में चौबीसों घंटे भारी वाहनों की कतार लगी रहती है। इस व्यस्ततम सड़क से वाहनों का लोड कम करने के लिए बाइपास रोड की मांग लगातार की जाती रही है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने करीब ढाई वर्ष पूर्व बाइपास रोड बनाने की घोषणा की थी। इस रोड के लिए सर्वे का काम करने लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया गया था। बाइपास रोड के लिए 10 किमी की सड़क बनाने का सर्वे किया गया। इस प्रोजेक्ट के लिए 84 करोड़ 62 लाख रुपए का बजट भी तैयार किया गया। बस इसके बाद से फाइल धूल खाते पड़ी है। फिलहाल यह तय है कि अभी बाइपास के लिए और इंतजार करना पड़ेगा। जाज्वल्यधानी का तेजी से विकास हो रहा है, इसके साथ ही यहां की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर भारी वाहनों के गुजरने के लिए बाइपास रोड नहीं है। इसके अभाव में आज भी भारी वाहन वर्षों पहले बने रूट जांजगीर शहर के नेताजी चौक, कचहरी चौक और लिंक रोड होते हुए गुजर रहे हैं। समय के साथ अब इस इस रूट में दर्जनों स्कूल के अलावा प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के अलावा घनी आबादी हो गई है, जिससे लोगों को दिन भर भारी वाहनों का खतरा बना रहता है।



सरकारी ढर्रा - दो साल पहले मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा, नगरवासियों को जगी थी उम्मीद, इंच भर भी नहीं सरकी बाइपास की फाइल

क्या होगा फायदा- भारी वाहनों के चांपा की ओर आवागमन के लिए आबादी रहित क्षेत्र में अलग से बाइपास बनाया जाता है तो इसका लाभ यह होगा कि यातायात व्यवस्था बाधित नहीं होगी। भारी वाहन 24 घंटे सीधे आउटर से आवागमन कर सकेंगे। सड़क दुर्घटना की संभावना कम होगी, क्योंकि बाइपास में मुख्य रुप से भारी वाहन ही चलेंगे। इसके अलावा छोटे वाहन चालक बीच शहर में आसानी ने बिना टेंशन के आवागमन कर सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस को भी कम बल की आवश्यकता होगी और सड़क हादसे कम होंगे। शहर में धूल, धुआं और ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी।



॥बाईपास की प्रक्रिया चल रही है। अभी निर्माण कार्य प्रारंभ होने में विलंब है। जमीन अधिग्रहण के लिए पटवारियों द्वारा रिकार्ड दुरूस्त किया जा रहा है।

विजय साहू, एसडीओ एनएच



क्या होगा फायदा- भारी वाहनों के चांपा की ओर आवागमन के लिए आबादी रहित क्षेत्र में अलग से बाइपास बनाया जाता है तो इसका लाभ यह होगा कि यातायात व्यवस्था बाधित नहीं होगी। भारी वाहन 24 घंटे सीधे आउटर से आवागमन कर सकेंगे। सड़क दुर्घटना की संभावना कम होगी, क्योंकि बाइपास में मुख्य रुप से भारी वाहन ही चलेंगे। इसके अलावा छोटे वाहन चालक बीच शहर में आसानी ने बिना टेंशन के आवागमन कर सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस को भी कम बल की आवश्यकता होगी और सड़क हादसे कम होंगे। शहर में धूल, धुआं और ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी।



शहर में बढ़ा

हादसे का खतरा

जांजगीर शहर के बीच से गुजरे एनएच से भारी वाहनों का आवागन तो कई सालों से होता आ रहा है पर अब शहर की आबादी और छोटे वाहनों की संख्या भी बढ़ गई है। वर्ष 1998 में जांजगीर- चांपा जिला बनने के बाद जांजगीर शहर जिला मुख्यालय बन गया। यहां कलेक्टोरेट, जिला पंचायत, जिला अस्पताल, जिला न्यायालय समेत विभिन्न विभागों के कार्यालय के अलावा बड़ी दुकानें और स्कूल- कॉलेज खुल गए। किसी न किसी काम से हर रोज जिलेभर के लोग यहां अपने साधन से पहुंचते हैं। दूसरी ओर शहर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र से हर दिन करीब दो हजार भारी वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।