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नहर में पानी होने के बावजूद नहीं हो रही बोनी
भास्कर न्यूज - जांजगीर
रबी फसल के लिए किसानों की मांग पर नहर में 17 जनवरी से पानी तो छोड़ दिया गया है, लेकिन किसान अब पीछे हट गए हैं। नवागढ़ के अलावा बलौदा, पामगढ़ और अकलतरा क्षेत्र के भी कुछ क्षेत्र में नहर सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है। नहर में पर्याप्त मात्रा में पानी होने के बावजूद धान की बोनी का काम अब तक शुरू नहीं किया गया है।
शासन ने किसानों की मांग पर ही नहर मरम्मत का काम अधूरा छोड़कर पानी दिया है। जिले में 47 हेक्टेयर में रबी धान की फसल के लिए नहर से पानी दिया जा रहा है , पर किसान अब फसल लगाने में रूचि नहीं दिखा रहे। नहरों में पानी छोड़े जाने के बाद किसानों के बोनी में व्यस्त होने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। खेतों की जुताई तक नहीं की जा रही है। ऐसे में हसदेव बांगो बांध से रबी की फसल के लिए नहरों में पानी छोड़े जाने का कोई फायदा होता नजर नहीं आ रहा है। किसानों का कहना है कि पानी देर से छूटने के कारण अब वे रबी धान की बोनी नहीं करना चाह रहे हैं। कब तक पानी मिलेगा इस बात को लेकर भी किसानों में असमंजस है।
सिंचाई के लिए नहर में छोड़ा गया पानी।
संघर्ष के बाद मिला पानी
रबी फसल के लिए नहर से पानी काफी संघर्ष के बाद मिला है। पूर्व में शासन व जल संसाधन विभाग द्वारा जिले की टूटी फूटी नहरों की मरम्मत कराने की योजना बनाई गई थी, लेकिन किसानों ने रबी फसल के लिए पानी की मांग की। किसान चेतना मंच ने इसके लिए संघर्ष किया। सांसद कमला देवी पाटले ने भी किसानों की मांग का पूरा समर्थन करते हुए इस दिशा में प्रयास किया। जिला जल एवं उपयोगिता समिति की बैठक में 2 जनवरी को कलेक्टर और सांसद की मौजूदगी में प्रस्ताव पारित किया गया कि जांजगीर और अकलतरा शाखा नहर में आने वाले सिंचित क्षेत्रों के लिए पानी दिया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने के लिए सरकार को भेजा गया। आखिरकार सरकार ने भी इस पर मुहर लगा दी और 17 जनवरी से बांगों बांध से पानी छोड़ा गया।
क्या कहते हैं किसान
किसान चेतना मंच के व्यास कश्यप और संदीप तिवारी का कहना है कि काफी संघर्ष के बाद पानी मिला है, पर किसानों में पानी चलने की अवधि को लेकर असमंजस है। पानी छूटने में देरी होने के कारण किसान इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों की मांग पर ही नहर में पानी छोड़ा गया है, इसलिए नहर के पानी का सदुपयोग करना चाहिए नहीं तो आने वाले सालों में किसानों की मांग पर सरकार द्वारा नहर खोले जाने की दिशा में ध्यान नहीं दिया जाएगा। सिंचाई के लिए 30 अप्रैल तक पानी नहरों मे प्रवाहित होगा और इतना वक्त खेती के लिए पर्याप्त है।