- Hindi News
- श्रद्धालुओं ने किया चडिय़ा संगम पर पुण्य स्नान
श्रद्धालुओं ने किया चडिय़ा संगम पर पुण्य स्नान
भास्कर न्यूज - जशपुरनगर
बुधवार को ब्रह्म निष्ठालय आश्रम सोगड़ा के पास स्थित ग्राम चडिय़ा के त्रिवेणी संगम में अनन्य दिवस धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और लोगों ने पुण्य स्नान किया। हर वर्ष होने वाले इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए और यहां के तीन नदियों के संगम में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
मान्यता है कि माघ कृष्ण पब की चर्तुदशी के दिन सर्वेश्वरी समूह के संस्थापक और अघोर संत अघोरेश्वर भगवान राम इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम में सिद्धी प्राप्त हुई थी। तब से इस दिन को सर्वेश्वरी उपासकों के द्वारा अनन्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। सर्वेश्वरी समूह के संस्थापक और अघोर संत अघोरेश्वर भगवान राम के देश भर में लाखों की संख्या में भक्त हैं, जो समूह के विभिन्न शाखाओं के माध्यम से आध्यात्मिक और समाज सेवा के कार्यों में जुटे होते हैं। इसी क्रम में अनन्य दिवस के अवसर पर ग्राम चडिय़ा स्थित त्रिवेणी संगम में बड़ी संख्या में छग, झारखंड और बिहार के श्रद्वालु संगम स्नान के लिए शनिवार को ग्राम चडिय़ा पहुंचे। सुबह 8 बजे सोगड़ा स्थित काली मंदिर से अवधूत भगवान राम के तैल्य चित्र के साथ झांकी निकाली गई, जिसमें कीर्तन भजन के साथ श्रद्धालु झूमते गाते चडिय़ा ग्राम के पास स्थित संगम स्थल पर पहुंचे। यहां सर्वेश्वरी समूह का ध्वजारोहण किया गया। सभी क्षेत्रों से आए श्रद्घालुओं ने यहां संगम स्नान किया और कीर्तन भजन में शामिल हुए। दिन के समापन पर सर्वेश्वरी समूह के ध्वज व स्थापित अघोरेश्वर भगवान राम के तैल्य चित्र पर पूजा अर्चना कर महाआरती की गई।
आरती के बाद भक्त पुन: भजन कीर्तन करते हुए वापस ब्रम्हनिष्ठालय आश्रम सोगड़ा पहुंचे। सोगड़ा में शाम होने पर जहां स्थानीय श्रद्धालुओं अपने घर लौटे वहीं अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने रात्रि विश्राम किया और रात में भी कीर्तन भजन का आयोजन किया गया। अनन्य दिवस के अवसर पर बुधवार शाम चडिय़ा त्रिवेणी संगम में आध्यात्मिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की शुरूआत सदानंद मिश्र के द्वारा मंगलाचरण के द्वारा की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने अपने विचार व्यक्त किए। -शेष पेज 14
मुख्य रूप से सोगड़ा आश्रम के धनंजय बाबा ने अघोरेश्वर महाप्रभु के विचारों की व्याख्या करते हुए त्रिवेणी संगम पर स्थान की महत्ता श्रद्घालुओं को बताई। धनंजय बाबा ने कहा कि यहां पर मनोरमा, लावा और सोगड़ा नदी का संगम होता है। अवधूत भगवान राम ने इस स्थान को पवित्र बताते हुए क्षेत्र के वनवासियों से कहा था कि जो भी लोग यहां माघ चतुर्दशी के दिन स्नान करेंगे उन्हें वहीं पुण्य लाभ प्राप्त होगा जो इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम में स्नान करने से प्राप्त होता है। गोष्ठी को संबोधित करते हुए आश्रम के वरिष्ठ सदस्य नारायणपुर के डॉ हसीलधर ने कहा कि अघोरेश्वर महाप्रभु ने अन्न को अन्नपूर्णा देवी के रूप में पूजा है और सम्मान दिया है। अघोरेश्वर के आदर्श हमारे जीवन को अनुशासित बनाते हैं, जिसपर चलकर हम अपना जीवन सुखमय बना सकते हैं। अधिवक्ता राम प्रकाश पांडे ने कहा कि अघोरेश्वर महाप्रभु ने जशपुर जिले में पदार्पण किया जब पाश्चात्य संस्कृति का यहां हमला हो रहा था। उन्होंने कहा कि जशपुर जिले के विभिन्न स्थल अघोरेश्वर भगवान राम की तपोस्थली और कर्म भूमि के रूप में पहचाने जाते हैं।उन्होंने कहा कि जब अवधूत भगवान राम जशपुर आए थे तो उन्होंने अधिकांश समय चडिय़ा में स्थिति त्रिवेणी संगम में दिया था। प्रोफेसर अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि हम अघोरेश्&52द्भ;वर भगवान राम के आदर्शों एवं उपदेशों का अनुकरण करें। ईश्वर ने हमें मनुष्य इसलिए बनाया है कि हम समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करें। साथ ही समाज की बुराइयों को दूर करते हुए विपदाओं को दूर करने में अपनी सहभागिता दें.उन्होंने भारतीय संस्कृति को दुनिया में प्रचारित करने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने को भी कहा। गोष्ठी को अभय सहाय, घाघरा झारखंड के शिव गुप्ता ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन संतोष मिश्रा के द्वारा किया गया। इस अवसर पर कृष्ण कांत, देवधन नायक, नरेश गुप्ता, विकास पांडे, मंटू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
समूह भोज में बैठे श्रद्धालु । पूजा करते पुजारी ।
भंडारे का आयोजन
अनन्य दिवस के अवसर पर चडिय़ा
त्रिवेणी संगम में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।भंडारे में प्रसाद के रूप में खिचड़ी भोग लेने के लिए पूरे दिन श्रद्धालु यहां आते रहे, वहीं भंडारे में स्वयं सेवक के रूप में बड़ी संख्या में युवाओं ने योगदान दिया। भंडारे में जहां सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु विभिन्न क्षेत्रों से आए थे, वहीं सोगड़ा, मनोरा ग्राम क्षेत्र के दर्जनों गांव के ग्रामीण भी यहां भंडारे में शामिल हुए।
संगम स्नान के लिए झारखंड, बिहार से भी आए श्रद्धालु, भजन कीर्तन के साथ भगवान अघोरेश्वर की उतारी आरती