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अटैचमेंट लिस्ट छुपाई तो होगी बीईओ से रिकवरी
भास्कर न्यूज - जांजगीर
स्कूलों में पढ़ाना छोड़ कर अन्य दफ्तरों में अटैच शिक्षाकर्मियों को उनके मूल शाला में भेजने के लिए जिला पंचायत व जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। सभी विकासखंडों से अटैच शिक्षाकर्मियों की सूची मंगाई जा रही है ताकि उन्हें उनकी मूल शाला के लिए जल्दी रिलीव किया जा सके। इस सूची में यदि किसी बीईओ या सीईओ ने किसी भी शिक्षाकर्मी के लिए मेहरबानी करते हुए जानकारी छुपाई और किसी ने कलेक्टर या सीईओ को शिकायत कर दी तो संबंधित शिक्षाकर्मी के अटैचमेंट की तिथि से उसके नियोक्ता अधिकारी से रिकवरी की जाएगी।
दैनिक भास्कर ने 22 जनवरी के अंक में ‘दफ्तरों में बाबूगिरी कर रहे शिक्षाकर्मी ’ शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की। इस खबर में बताया गया था कि जिले के करीब 200 से ज्यादा शिक्षाकर्मी स्कूलों को छोड़कर नियम विरुद्ध किसी न किसी संस्था में अटैच हैं और उनके स्कूलों की पढ़ाई ठप है। इसके बाद जिला पंचायत के सीईओ टामनसिंह सोनवानी ने सभी विकासखंडों के बीईओ और सीईओ तथा डीईओ की बैठक लेकर अटैच शिक्षाकर्मियों की पूरी जानकारी मांगी थी। तीन दिनों के अंदर कार्यमुक्त करते हुए उनकी मूल शाला के लिए रिलीव करने का आदेश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि अटैच शिक्षाकर्मियों की तनख्वाह शाला विकास समिति के सदस्यों द्वारा उनकी उपस्थिति प्रमाणित करने के बाद ही निकलेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि अटैच शिक्षाकर्मियों की उपस्थिति पंजी पर हस्ताक्षर करने वाले सरपंच के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जिला पंचायत सीईओ ने जिले भर में अटैच शिक्षाकर्मियों की नाम व अटैचमेंट की तिथि सहित जानकारी मंगाई है। उन्होंने हिदायत दी है कि किसी भी स्थिति में जानकारी न छुपाई जाए। अंतिम जानकारी देने के बाद यदि किसी के अटैचमेंट की शिकायत मिली तो संबंधित बीईओ और सीईओ के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
22 जनवरी को प्रकाशित खबर।
सख्ती के बाद दावा लौटने का, हकीकत जमे हैं पांव
जिला पंचायत की सख्ती के बाद अधिकारियों का दावा है कि अटैच शिक्षाकर्मी अपनी मूल शाला के लिए लौटने लगे हैं, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। अभी भी शिक्षाकर्मी अंगद के पांव की तरह जमे हैं।
॥सभी विकासखंड के बीईओ और सीईओ को निर्देशित किया गया है कि वे अटैच शिक्षाकर्मियों को रिलीव करें और उनके क्षेत्र में कितने लोग अटैच हैं उसकी जानकारी नाम सहित दें। इसके बाद भी अटैचमेंट की शिकायत मिली तो संबंधित अधिकारी के वेतन से रिकवरी की जाएगी।
केएन पटेल, प्रभारी शिक्षा शाखा जांजगीर
निर्वाचन शाखा से हटाना जरूरी
तहसीलों में निर्वाचन कार्य के नाम कई शिक्षाकर्मी वर्षों से जमे हैं। उनका दावा है कि निर्वाचन कार्य में होने के कारण कोई उन्हें हटा नहीं सकता। ऐसे लोग अब निर्वाचन का काम कम और अधिकारियों से पहचान होने का दावा करते हुए अन्य प्रशासनिक कार्यों में दखल व चुनाव ड्यूटी लगाने के नाम पर शिक्षकों को परेशान ज्यादा करने लगे हैं। ऐसे बाबूओं को तहसीलों के निर्वाचन कार्य से मुक्त करना निहायत जरूरी हो गया है।
अटैच शिक्षाकर्मियों को स्कूल भेजने की हो रही तैयारी
हिदायत - जिपं के सीईओ ने मंगाई सभी ब्लॉकों से शिक्षाकर्मियों की जानकारी