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स्थानीय निकाय मंत्री सावित्री से ‘शक्ति’ मांगेंगे महापौर

8 वर्ष पहले
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अम्बाला -!- मेयर की कुर्सी मिली तो सोचा था कि कामकाज के लिए ‘पावर’ मिलेगी लेकिन हुआ इसके उलट। एक छोटा-सा काम कराने के लिए स्वयं उन्हें भी इजाजत लेनी पड़ती है। यह कहना है निगम के मेयर रमेश मल का। मगर अब वह स्थानीय निकाय मंत्री सावित्री जिंदल के समक्ष खुद को ज्यादा ‘पावरफुल’ बनाने की मांग करेंगे। आगामी 10 जनवरी को अम्बाला के अलावा प्रदेश के अन्य छह निगमों के मेयर चंडीगढ़ में होने वाली बैठक में शिरकत करेंगे। बैठक में मेयरों के साथ मंत्री जिंदल निगम के कामकाज व अन्य मुद्दों पर चर्चा करेंगी।



शक्तियां डीसी को, हमारे पास स्वैच्छिक फंड भी नहीं

मेयर रमेश मल ने कहा कि मेयर का पद पावरफुल होता है, मगर यहां पर तो सभी शक्तियां डीसी के पास हैं। खर्च करने के लिए हमारे पास स्वैच्छिक फंड तक नहीं है। यदि कहीं पर इलाके का दौरा करने जाते हैं तो लोग सड़क व नाली बनाने की मांग उनके समक्ष कर देते हैं। इतनी शक्ति भी नहीं है कि वहां पर नाली या सड़क बना दी जाए। एक छोटा-सा भी काम कराने के लिए डीसी को कहना पड़ता है। खुद शक्तिविहीन हैं, इस वजह से कर्मचारी भी उनकी ज्यादा बात नहीं सुनते। किसी कर्मचारी के खिलाफ एक्शन लेने तक की पावर नहीं, न ही उनके तबादले की। विकास कार्यों के लिए होने वाले टेंडर में हस्तक्षेप करने का भी ज्यादा अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मंत्री से बैठक के दौरान निगम में फंड उपलब्धता का मामला उठाया जाएगा। बिना फंड के निगम में कामकाज प्रभावित है। इसके अलावा वाहन पर लालबत्ती इस्तेमाल की मांग की जाएगी।

मंत्री के साथ बैठक के यह एजेंडे

ञ्च मेयर की सरकार से अपेक्षाएं।

ञ्च निगम की नियमित बैठकें सुनिश्चित करना।

ञ्चमेयर को स्टाफ की उपलब्धता।

ञ्च मेयर की शक्तियों को व्यवहारिक रूप देना।

ञ्च मेयर कार्यालय की व्यवस्था व अन्य सुविधा।

ञ्च सभी निगमों में स्वतंत्र रूप से आयुक्त नियुक्त करना।

ञ्च मेयर को जरूरी खर्च के लिए प्रशासनिक शक्तियां देना।

अम्बाला में अभी यह हालात

ञ्च मेयर सप्ताह में तीन दिन सिटी व कैंट में दो दिन बैठते हैं।

ञ्चसिटी में उनका ऑफिस तैयार है, मगर कैंट में अब तक बैठने को ऑफिस नहीं मिला है।

ञ्चउनके पास सरकारी आवास भी नहीं है।

ञ्चमेयर के साथ कामकाज में मदद के लिए कोई स्टाफ नहीं है।