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गुरु का इतिहास सुनाकर संगत को निहाल किया

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - अम्बाला सिटी
ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री मर्दों साहिब में सालाना गुरुमत समागम के आखिरी दिन गुरुवार को संगत ने गुरु बाणी व कथा कीर्तन का आनंद प्राप्त किया। इस अवसर पर दीवान सजाया गया। समागम कीर्तन के साथ प्रारंभ हुआ।
कीर्तनी जत्थे भाई लखविंदर सिंह हुजूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर, भाई सुच्चा सिंह, सुर विंड सिंह कविश्री जत्था, ज्ञानी गुरमेल सिंह का ढाडी जत्था, गुरु मंजी साहिब के हेड ग्रंथी एवं कथावाचक ज्ञानी शेर सिंह के जत्थों ने कीर्तन व गुरु इतिहास से संगत को निहाल किया। ज्ञानी शेर सिंह ने अपने प्रवचनों में कहा कि हमें गुरबाणी के अनुसार चलकर अपने जीवन को सही दिशा देनी चाहिए, क्योंकि यह वह पवित्र स्थान है, जहां श्री गुरु तेग बहादुर जी ने अपने चरणों से इस धरती को पवित्र किया था, जिन्होंने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए दिल्ली के चांदनी चौक में अपनी शहादत दी थी। इस अवसर पर हरपाल सिंह ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी अपनी बाल्य अवस्था में जब अपने ननिहाल श्री लखनौर साहिब आए थे तब उनकी दूसरी मुलाकात पर इसी स्थान पर पीर भीम शाह से हुई थी। इस अवसर पर जुझार सिंह शाहपुर, सतवंत सिंह ढींढसा, अमरजीत सिंह सुंदर नगर, जगतार सिंह व गुरचरण सिंह तेजा, बाबा हरबंस सिंह रवालों, गुरदीप सिंह भानोखेड़ी, मक्खन सिंह लबाना मौजूद रहे।



गुरुद्वारा श्री मर्दांे साहिब में सालाना गुरमत समागम के अंतिम दिन मौजूद संगत।