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आपराधिक मामलों के शिकार लोगों को मिलेगा मुआवजा

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - अम्बाला सिटी
आपराधिक मामलों के शिकार लोगों को अब राज्य सरकार मुआवजा देगी। हरियाणा पहला ऐसा राज्य है जिसमें पीडि़त मुआवजा योजना का आगाज हुआ है। अब तक तीन लोगों को योजना के तहत 7 लाख रुपए की राशि उपलब्ध करा दी गई है। गुरुवार को सेशन जज एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चेयरमैन हरनाम सिंह ठाकुर ने मीडिया को योजना की विस्तार से जानकारी दी। कानून में सीआरपीसी की धारा-357 के तहत पीडि़त परिवारों को मुआवजा देने का प्रावधान किया है। मगर आमतौर पर सजा होने के बाद मुजरिम मुआवजे की अदायगी नहीं करते। इसी कारण पीडि़त को आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती थी। सेशन जज ने बताया कि सीआरपीसी में बदलाव के बाद अब धारा-357ए के तहत पीडि़त परिवारों को मुआवजा दिया जा रहा है।
समस्याओं का होगा समाधान: सेशन जज हरनाम ठाकुर ने बताया कि स्थायी लोक अदालत में यदि कोई व्यक्ति बिजली, पानी, बैंक, रसोई गैस या अन्य किसी विभागीय समस्या के समाधान के लिए सादे कागज पर आवेदन करेगा तो उसका भी समाधान होगा। ऐसे मामलों में विभागीय अधिकारियों को जुर्माने की सजा सुनाए जाने का प्रावधान है।
32 हजार केस लंबित: अम्बाला की अदालतों में इस समय 32 हजार केस लम्बित हैं। महिला तथा बाल उत्पीडऩ से जुड़े मामलों का 31 मार्च तक निपटारा कर दिया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आम जनता के लिए फ्री हेल्पलाइन ((नंबर 0171-2532142)) शुरू की गई है। इस नंबर पर फोन करके सभी कानूनी व गैरकानूनी सुविधाओं के बारे में जानकारी ली जा सकती है। इस अवसर पर सीजेएम एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रवनीत गर्ग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जिला कॉर्डिनेटर एनके साहनी भी मौजूद थे।



ये होंगी शर्तंे

हरनाम ठाकुर ने बताया कि मुआवजा उन परिवारों को दिया जाएगा जिनकी सालाना आय 4.50 लाख से कम होगी। सरकारी या फिर अर्धसरकारी सेवा के किसी व्यक्ति को मुआवजा नहीं मिलेगा। छह महीने में पीडि़त को मुआवजे के लिए स्वयं आवेदन करना होगा। यदि किसी व्यक्ति का कत्ल हो जाता है या हादसे में वह विकलांग हो जाता है तो उसे प्राधिकरण की ओर से मुआवजा मिलेगा। मरने वाले व्यक्ति की आयु यदि 40 वर्ष से कम हो तो उसके आश्रितों को 3 लाख रुपए, 40 से 60 वर्ष आयु वर्ग वाले मृतकों के परिवार को 2 लाख तथा 60 वर्ष से अधिक आयु के मृतकों को 1 लाख रुपए की राशि दी जाएगी। झगड़े या फिर हादसे में 80 प्रतिशत विकलांग होने की स्थिति में 2 लाख, 1 लाख तथा 50 हजार व 50 प्रतिशत विकलांग होने पर 1 लाख, 50 हजार व 25 हजार की राशि देने का प्रावधान है। बलात्कार पीडि़ता को 3 लाख तथा मानव तस्करी, अपहरण, छेड़छाड़ का दंश झेलने वाली महिलाओं को, बच्चों के कठोर मानसिक दुख से नुकसान होने पर 50 हजार की राशि मिलेगी।