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नौसीखियों के कारण ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं
भास्कर न्यूज - अम्बाला
सिटी सिविल अस्पताल में ऑन लाइन कंप्यूटराइज्ड रजिस्ट्रेशन के लिए स्टाफ की भर्ती हो चुकी है। कंप्यूटर भी खरीदे जा चुके हैं, लेकिन ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं हो पाया है।
प्रदेश सरकार की घोषणाओं का यहां कोई असर नहीं दिख रहा है। विशेष बात यह है कि ऑन लाइन सिस्टम कैसे आपरेट किया जाना है, इसके लिए अस्पताल के पास ट्रेंड स्टाफ नहीं है। कुछ नौसीखियों से काम लेने की कोशिश की गई, लेकिन बाद में वे भी हाथ खड़े कर दिए। अस्पताल प्रशासन के इस रवैये का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
अस्पताल में टोकन सिस्टम शुरू किए जाने के बाद अब मरीजों का ओपीडी रजिस्ट्रेशन भी कंप्यूटराइज्ड व ऑन लाइन किया जाना था। रिकार्ड को ऑन लाइन करने रिकार्ड लंबे समय तक संभाला व दवाओं की जरूरत की पल पल की जानकारी विभाग के पास रहती।अस्पताल को सेंट्रलाइज्ड करने की दिशा में यह कदम आगे
नहीं बढ़ पाया। कंप्यूटराइज्ड तरीके से रजिस्ट्रेशन करने के लिए चार विंडो पर कंप्यूटर लगाए गए हैं। जिसका काम डाटा एंट्री आपरेटर के हवाले है।
रोजाना 1200 से ज्यादा होते हैं रजिस्ट्रेशन
॥ऑनलाइन सिस्टम को आपरेट करने की कोशिश की गई थी। ऑपरेटर्स सही ढंग से चला नहीं पाए। अब स्वास्थ्य महानिदेशक से को-आर्डिनेट करने की कोशिश की जा रही है। जिससे इस सिस्टम का लाभ लोगों को मिल सके।
डॉ. पूनम जैन, कार्यकारी पीएमओ, अम्बाला।
कंप्यूटराइज्ड एमएलआर ठप
स्वास्थ्य विभाग भले ही रजिस्ट्रेशन कंप्यूटराइज्ड करने जा रहा हो, लेकिन इससे पहले कंप्यूटराइज्ड एमएलआर प्रक्रिया ठप हो चुकी है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों पर सभी अस्पतालों में एमएलआर को कंप्यूटराइज्ड देना अनिवार्य किया गया था। सिविल अस्पताल ने कुछ दिन प्रक्रिया लागू की गई लेकिन बाद में यह ठप पड़ गई।
सिविल अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजाना औसतन 1200 से ज्यादा लोग यहां इलाज व चेकअप के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराते हैं। रजिस्ट्रेशन से ओपीडी व बाद में दवाई लेने तक का एक लंबा प्रोसेस है। जिससे मरीजों को गुजरना पड़ता है। ओपीडी के लिए ऑन लाइन कंप्यूटराइज्ड रजिस्ट्रेशन शुरू होने से लोगों का समय बचेगा।
सिटी सिविल अस्पताल में प्रदेश सरकार की घोषणाओं का नहीं दिखा असर