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भिवानी का दिल रोहतक से जोड़ेगी 17 किमी की सड़क

8 वर्ष पहले
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सुखबीर मोटू - भिवानी
17 किलोमीटर लंबी सड़क भिवानी के लोगों का दिल रोहतक से जोड़ेगी। सात साल तक हुड्डा सरकार पर विकास में भेदभाव के आरोप का पहला उदाहरण यही सड़क होती थी। अब करीबन डेढ़ महीने में इसका निर्माण पूरा हो जाएगा और खर्च आएगा 8 करोड़ रुपये। सड़क बनने के बाद भिवानी से लेकर दिल्ली तक का सफर बेहद आरामदायक हो जाएगा और सड़क पर सियासत का सफर भी खत्म होगा।
भिवानी से कलानौर तक इस दिल्ली-पिलानी हाईवे पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। १७ किलोमीटर की यह सड़क पिछले सात साल से टूटी पड़ी है। कलानौर से रोहतक तक यह सड़क फोरलेन बनी हुई है और बीच में डिवाइडर भी है। कलानौर से आगे यह सुहाने सफर का अहसास कराती है। भिवानी में ये सड़क हुड्डा सरकार द्वारा विकास में भेदभाव का सबसे बड़ा उदाहरण बनी हुई है। हुड्डा सरकार के कामकाज पर टिप्पणी की बात आते ही भिवानी के लोग कहेंगे कि भिवानी से निकलते ही सड़क से ही बता देगी कि विकास कहां हुआ है और कहां नहीं। खुद भिवानी जिले के कांग्रेसियों के पास इस बात की काट नहीं थी और सीएम से कई बार इस सड़क को बनवाने की गुहार भी सार्वजनिक मंचों से की गई पर सड़क नहीं बनी।




डेढ़ महीने तक पूरा होने की उम्मीद, ८ करोड़ होंगे खर्च

॥हमने भिवानी की सीमा में आने वाले दिल्ली मार्ग का निर्माण शुरू करा दिया है। इस मार्ग पर यह निर्माण लगभग साढ़े सात साल बाद कराया जा रहा है। इस काम पर विभाग आठ करोड़ रुपये खर्च करेगा और यह काम एक से डेढ़ महीने में पूरा हो जाएगा।ञ्जञ्ज

एके महता, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, भिवानी।

नेशनल हाईवे की घोषणा दो साल पहले हुई थी

सरकार ने पानीपत से गोहाना, रोहतक, भिवानी, लोहानी, लोहारू वाया पिलानी से राजगढ़ तक के सड़क मार्ग को 22 फरवरी 2013 को नेशनल हाईवे का दर्जा दिया था। इस कारण इस मार्ग पर पीडब्ल्यूडी ने कोई काम नहीं किया। इसके बाद पहले से ही खराब इस मार्ग की हालत दिनों दिन बिगड़ती चली गई। दूसरी ओर नेशनल हाईवे अथारिटी इस मार्ग का निर्माण इसलिए नहीं कर रही थी कि उसे यह मार्ग सही हालत में मिलना चाहिए। इसलिए अब हाइवे अथारिटी के कहने पर पीडब्ल्यूडी ने इस बाकी बचे 17 किलोमीटर के टुकड़े पर निर्माण का काम शुरू कर दिया है।

सात साल बाद शुरू हुआ दिल्ली-पिलानी हाइवे का निर्माण

भिवानी से लेकर दिल्ली तक का सफर हो जाएगा आरामदायक, नहीं लगेंगे हिचकोले

सड़क पर सियासत खत्म - हुड्डा सरकार पर विकास में भेदभाव के आरोप का पहला उदाहरण थी