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1955 से अपना गणतंत्र मना रहा माधोगढ़

8 वर्ष पहले
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सुखबीर मोटू - भिवानी
एक गांव है माधोगढ़। पहचान जुड़ी है गणतंत्र से क्योंकि जश्न ही इतना बड़ा होता है हर बार गांव में। हर बार की तरह मुख्य आकर्षण होगा, यहां कराई जाने वाली ऊंटों और घोड़ों की दौड़। जो जीता उसे पंचायत अपने स्तर पर नकद इनाम से नवाजेगी। माधोगढ़ गांव पिछले विधानसभा चुनावों से पहले लोहारू विधानसभा क्षेत्र की सीमा का अंतिम गांव था। अब यह गांव महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र में है। इस समय इस गांव की सरपंची रिटायर्ड अध्यापक दुलीचंद नेहरा के हाथ में है।
इस बारे में नेहरा जी बताते हैं कि उनके गांव में हर साल गणतंत्र दिवस मनाया जाता रहा है। इसके लिए गांव के सरकारी स्कूल के पीछे बने बड़े मैदान में पहले ध्वजारोहण होता है। इसके बाद स्कूली विद्यार्थी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करते हैं। बाद में यहां शुरू होती है ऊंटों और घोड़ों की दौड़। इसमें राजस्थान और दिल्ली तक के लोग शामिल होते हैं। इसके अलावा इस दिन यहां कबड्डी स्पर्धा के अलावा बूढ़ों की दौड़ भी कराई जाती है।
पिछले साल एक ऊंट डेढ़ घंटे तक नाचा
नेहरा ने बताया कि पिछले साल गणतंत्र दिवस पर यहां राजस्थान के झुंझनू जिले से सजा धजा एक ऊंट आया था। उस ऊंट ने मैदान में बिना रुके डेढ घंटे तक डांस किया था। इस पर उस ऊंट के मालिक को विशेष रूप से 11 हजार रुपये का इनाम दिया गया था। उस ऊंट मालिक को इस बार भी बुलाया है। इसके अलावा पिछले साल ऊंटों, घोड़ों और कुश्ती के विजेताओं को 5100:5100 हजार रुपये के इनाम दिए गए थे।नेहरा ने बताया कि शुरू में गणतंत्र दिवस पड़ोसी गांव डालनवास में मनाया जाता था। उसमें कई गांवों के लोग जाया करते थे। मगर 1955 में हमारे गांव के लोगों का डालनवास वालों के साथ मनमुटाव हो गया। इस पर उसी दिन गांव के लोगों ने फैसला किया कि भविष्य में माधोगढ़ में ही गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। तब से लेकर आज तक हर साल गांव में गणतंत्र दिवस लगातार मनाया जा रहा है। तब वे पांचवीं या छठी कक्षा में पढ़ते थे। अब यहां हर साल 20 से ज्यादा गांवों के हजारों लोग यहां एकत्र होते हैं। नेहरा ने बताया कि गणतंत्र दिवस पर यहां गांव का सरपंच या गांव कोई अन्य मौजिज व्यक्ति ध्वजारोहण करता है।
दो फिल्मों की हो चुकी है शूटिंग
नेहरा ने बताया कि उनके गांव का नाम बालीवुड तक मशहूर है। इसके लिए कुछ महीने पहले यहां ‘ऊंचा नीचा गांव’ और ‘कौन कितने पानी में’ नामक फिल्मों की लगातार 22 दिन तक शूटिंग हुई थी। इसके लिए बालीवुड के गुलशन ग्रोवर, कुणाल कपूर और दीपिका आमटे जैसे कलाकार उनके मकान के आधे हिस्से में रहे थे।