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रोडवेज के कर्मचारी नेताओं को काम पर लगाने का फरमान

7 वर्ष पहले
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अशोक कौशिक - भिवानी
रोडवेज प्रबंधन ने आगे होने वाली हड़तालों और विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाने के लिए कर्मचारी नेताओं पर अंकुश लगाना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में यूनियन के जितने भी पदाधिकारी चालक और परिचालक हैं उनके लिए ड्यूटी करना अनिवार्य किया गया है।
इतना ही नहीं हर दिन डिपो महाप्रबंधक को उनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट सुबह दस बजे विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव को भेजनी होगी। प्रदेश व्यापी हड़ताल की सफलता के बाद अब रोडवेज प्रबंधन यूनियन नेताओं को सबक सिखाने के लिए फ्रंट फुट पर आ गया है। विभाग के वित्तायुक्त ने प्रदेश के सभी डिपो महाप्रबंधक को ईमेल से संदेश भेजकर ऐसे यूनियन प्रतिनिधियों को चिंहित करने को कहा है, जो विशेषकर चालक और परिचालकों के पद पर तैनात हैं। ऐसे यूनियन प्रतिनिधियों को अब ड्यूटी करनी होगी। उन पर नजर रखने के लिए स्वयं महाप्रबंधक की ड्यूटी निर्धारित की गई है।
रोडवेज में जो कर्मचारी यूनियन का प्रतिनिधि चुना जाता है, उनमें अधिकांश अपनी ड्यूटी की अपेक्षा या तो कार्य ही नहीं करते या फिर अपनी ड्यूटी ऐसी जगह लगवा लेते हैं, जिससे उनका यूनियन संबंधी कार्य प्रभावित न हो। यह सब रोडवेज के स्थानीय प्रशासन के साथ आपसी विचार-विमर्श के साथ तय किया जाता रहा है। सरकार की ओर से केवल उन्हीं कर्मचारी नेताओं को उसी दिन कार्य न करने में छूट होती है, जिस दिन सरकार उन्हें बातचीत के लिए या अन्य किसी कार्य के लिए दूसरी जगह बुलवाती है।
तो गैर हाजिरी लगा देंगे: डिपो महाप्रबंधक यूएस दूहन ने बताया कि वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव के आदेशानुसार यूनियन प्रतिनिधि चालक व परिचालकों को ड्यूटी करने के आदेश दे दिए हैं। कुछ कर्मचारी ड्यूटी पर आ गए हैं। जो ड्यूटी नहीं करेगा उसकी गैर हाजिरी लगा दी जाएगी।
ड्यूटी निभा रहे हैं यूनियन सदस्य: हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संबंधित महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष दलबीर नेहरा ने कहा कि हमारे जितने भी यूनियन सदस्य हैं, वे अपनी ड्यूटी सही तरह से निभा रहे हैं, जहां भी उनकी ड्यूटी लगाई हुई है।



एक दर्जन कर्मचारियों की ड्यूटी कहीं, नियुक्ति कहीं

कोई कर्मचारी नेता परिचालक के पद पर तैनात है। वह अपनी सहूलियत अनुसार विभाग के अधिकारियों से मिलकर अपनी ड्यूटी, अड्डा कंडक्टर, ट्रैफिक ब्रांच अन्य ब्रांचों में लगवा लेता है। भिवानी डिपो में ऐसे करीब एक दर्जन कर्मचारी हैं, जिनकी नियुक्ति किसी पद पर है तो काम किसी पद पर। यह भिवानी डिपो की हीं नही अपितु हर डिपो में इस तरह की व्यवस्थाएं हैं।

मनोबल तोडऩे को पहली बार जारी हुआ ऐसा आदेश

हालांकि सरकार समय-समय पर कर्मचारी नेताओं की ड्यूटी संबंधी जानकारी तो ली जाती रही है लेकिन सरकार ने ऐसा आदेश पहली बार दिया है। इस संबंध में कर्मचारी नेता जगदीश ने बताया कि यह पत्र केवल कर्मचारियों का मनोबल तोडऩे के लिए जारी किया गया है। यूनियन के सभी सदस्य नेता अपना कार्य पहले ही कर रहे हैं तो इस तरह के पत्र का कोई मतलब ही नहीं होता।



आदेश - हड़ताल की सफलता के बाद यूनियन नेताओं को सबक सिखाने के लिए फ्रंट फुट पर आया रोडवेज प्रबंधन, विभाग के वित्तायुक्त ने डिपो महाप्रबंधकों से मांगी प्रोग्रेस रिपोर्ट