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खुले दरबार में छलका नप से परेशान लोगों का दर्द
भास्कर न्यूज - भिवानी
साहब! मेरे मकान की एसेसमेंट दिलवा दो, पिछले पांच माह से चक्कर काट रहा हूं। साहब! मकान नाम चढ़वा दो पिछले एक साल से भटक रहा हूं। साहब! आपके कर्मचारियों ने मेरी फाइल गुम कर दी है, उसको ढूंढ़वा दो मेहरबानी होगी। साहब! दो बार प्रोपर्टी टैक्स भरवा लिया, उसको एडजस्ट करवा दो। यह नजारा था सोमवार को नगर परिषद कार्यालय में सजे खुले दरबार का।
सोमवार को लगे नगर परिषद के खुले दरबार में 250 समस्याएं रखी गई। हालांकि चेयरमैन विजय पंचगांवा, कार्यकारी अधिकारी एसके गोयल, कंवर सैन सहित स्टॉफ अधिकारी व कर्मचारियों ने लोगों की सभी समस्याओं का समाधान मौके पर ही कर दिया। लेकिन इस दौरान नगर परिषद की कार्यप्रणाली से दुखी लोगों का दर्द साफ नजर आया। खुले दरबार में मकान ट्रांसफर संबंधित 120, प्रोपर्टी टैक्स रसीद संबंधी 80, मकान व दुकान के नक्शे संबंधित 100 समस्याएं आईं, जिनका मौके पर ही समाधान किया गया।
इन साहब की तो फाइल ही गुम कर दी
साहब! पिछले छह माह से मकान को भाई के नाम चढ़वाने के लिए चक्कर काट रहा हूं। कर्मचारियों ने फाइल गुम हो गई है दोबारा बनवा कर दो। यह समस्या रखी महावीर ने। महावीर की शिकायत सुन चेयरमैन विजय पंचगांवा ने संबंधित कर्मचारी को फटकार लगाई व समस्या का समाधान किया।
लोगों ने 250 समस्याएं रखीं, जिनका मौके पर ही समाधान किया गया
वेतन व रेहडिय़ां दिलवा दो
साहब नगर परिषद कर्मचारियों को रिहायशी प्लॉट, ठेकेदार के माध्यम से लगे कर्मचारियों को वेतन व सफाई के लिए गंदगी उठाने की 300 रेहडिय़ां मंगवा दो। नगर परिषद कर्मचारी संघ के प्रधान महेंद्र ने बताया कि पिछले काफी समय से कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उम्मीद है कि खुले दरबार में कर्मचारियों की मांगों की तरफ भी ध्यान किया जाएगा।
यूं ही कटाए छह महीने चक्कर
चिरंजीव कॉलोनी निवासी सूबे सिंह ने बताया कि वह छह माह से नाम चढ़वाने के लिए चक्कर काट रहा है। फाइल चेक की तो पाया कि मकान की रजिस्ट्री व फाइल में लिखा नंबर गलत है। उसे कहा गया कि नंबर ठीक करा लाओ काम हो जाएगा। सूबेसिंह ने कहा कि छह माह पहले बता देते तो अब तक समस्या का समाधान हो जाता।
यह तो भरा गया, एडजस्ट नहीं होगा
साहब! पिछले तीन साल से नगर परिषद कार्यालय में रिकार्ड नहीं होने के कारण गलती से भरे हुए हाउस टैक्स को एडजस्ट कराने के लिए चक्कर काट रहा हूं। कृपा करके मेरी समस्या का समाधान करवा दीजिए। यह शिकायत रखी पुराने हाउसिंग बोर्ड निवासी जगदीश चंद्र ने। उन्होंने बताया कि 14--9-2007 को उन्होंने 2007 व 2008 का प्रोपर्टी टैक्स भरा था। 2009 में दोबारा से 2007 व 2008 का टैक्स दोबारा से भरा लिया। जब 2011 में हाउस टैक्स भरने गया तो अधिकारियों ने फिर कहा कि आपका 2007 से हाउस टैक्स बकाया है भरना पड़ेगा। जब मैंने घर पर आकर रिकार्ड देखा तो उसमें मुझे वह रसीद मिल गई, जिसमें मैने दो बार 2007 व 2008 का बिल भरा था। इस पर जब मैं नगर परिषद कार्यालय में गलती से भरे हुए टैक्स को एडजस्ट कराने गया तो अधिकारी ने कहा कि यह तो भरा जा चुका है, एडजस्ट नहीं होगा। साहब समस्या का समाधान करवा दो।
रुपये ले लिए, पर रिकार्ड में चढ़ाना भूल गए
साहब! 2011 में मकान बनाया था। मकान बनाने के बाद जब नगर परिषद कार्यालय में नक्शा पास कराने गए तो अधिकारी ने बताया कि आपके मकान पर तो केस चल रहा है, आपने बिना नक्शा पास कराए मकान बनाया है। इसके लिए आपको 11,570 रुपये समझौता राशि जमा करानी पड़ेगी, इसके बाद केस को वापस ले लिया जाएगा। यह समस्या रखी विद्यानगर निवासी ईश्वर सिंह ने। उन्होंने कहा कि राशि जमा कराने के बाद भी कोर्ट की तरफ से नोटिस मिल रहा है। समस्या को जांचने के बाद अधिकारी ने बताया कि कर्मचारी आपकी ओर से जमा कराई गई राशि को रिकार्ड में चढ़ाना भूल गए थे, इस कारण नोटिस मिल रहे थे। आगे से आपको नोटिस नहीं मिलेगा।