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सिविल अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट आया तो अल्ट्रासाउंड मशीन खराब
भिवानी से रेडियोलॉजिस्ट की सुविधा मिली तो अब मशीन जर्मनी की मदद से ठीक होगी
भास्कर न्यूज - चरखी दादरी
सरकार की स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शायद शहर के सिविल अस्पताल में लागू नहीं होती, तभी तो अधिकारी यहां की कमियां दूर नहीं करना चाहते। यहां पिछले चार महीने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे। पहले डेढ़ महीने रेडियोलॉजिस्ट नहीं था, बाद में मिला तो मशीन जवाब दे गई। मशीन ठीक कराने के लिए उसके पार्ट को जर्मनी भेजना पड़ा, लेकिन एक माह बाद भी वह ठीक होकर नहीं आ सका। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट पैथालॉजी में ज्यादा पैसे देकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
प्रदेश के लोगों के स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा योजना को सरकार ने लागू किया था। योजना कागजों में तो लागू कर दी गई, लेकिन हकीकत से इसका कोई वास्ता नहीं है। इस बारे में किसी के पास भी कोई सही जवाब नहीं है। उपमंडल के सबसे बड़े सिविल अस्पताल में तो इस योजना का लाभ अभी तक ठीक से मरीजों को नहीं मिल रहा। अस्पताल में रखी लाखों रुपये की अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले साढ़े तीन महीने से काम नहीं कर रही। सितंबर-अक्टूबर में अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं था। इस कारण मशीन से काम नहीं लिया जा रहा था। इसके बाद सप्ताह में दो दिन के लिए भिवानी से रेडियोलॉजिस्ट की सुविधा मिली तो मशीन जवाब दे गई। इस प्रकार पिछले चार महीने से इस मशीन का लोगों को कोई फायदा नहीं मिल पा रहा। नवंबर में रेडियोलॉजिस्ट स्थाई तौर पर अस्पताल को मिल गया। मरीजों ने सोचा कि चलो अब तो जेब पर पडऩे वाले खर्चे में कुछ बचत होगी।
अस्पताल अधिकारियों ने मशीन को ठीक करवाया तो दो चार दिन मशीन ने कार्य किया, उसके बाद मशीन जवाब दे गई। हिसार से मैकेनिक बुलाया। वो मशीन के कुछ पार्ट अपने साथ ले गया। 20 दिन बाद जब उससे पूछा गया तो जवाब मिला कि मशीन के पुर्जे को जर्मनी भेजा जाएगा और कम से कम एक महीना लगेगा। अब तो महीने से ऊपर का समय बीत चुका है, लेकिन मशीन चालू नहीं हो पाई है।
निजी अस्पताल संचालकों की मौज
सिविल अस्पताल की मशीन खराब होने के कारण मरीजों व गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। निजी संचालक इनसे मनचाहे रुपये ले रहे हैं। गर्भवती महिलाओं का सिविल अस्पताल में नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड होता है, वहीं बाहर इन्हें अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए 300 से 400 रुपये देने पड़ते हैं। जिससे मरीजों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अस्पताल में इलाज के लिए आईं संतोष, मनीषा व भतेरी ने बताया कि जब भी आते हैं तो अल्ट्रासाउंड के कमरे का ताला लगा मिलता है। पूछने पर कहते हैं कि मशीन खराब है। आप बाहर से अल्ट्रासाउंड करा लो। चेक हम कर देंगे।
जर्मनी भेजी है मशीन: डॉ. उमेद
एसएमओ डॉ. उमेद दिसोदिया का कहना है कि अल्ट्रासाउंड मशीन में कोई बड़ा फाल्ट है। उसके खराब पार्ट को ठीक कराने के लिए जर्मनी भेजा गया है। मैकेनिक से बात हुई है, पार्ट आते ही मशीन शुरू कर दी जाएगी।
लगा रखा है ताला
अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने के चलते कमरे पर अस्पताल प्रशासन ने ताला लटका रखा है। मरीजों को अपने यहां बुलाने के लिए बाहर जगह जगह अल्ट्रासाउंड वालों ने अपना जाल भी फैला रखा है। वहीं अस्पताल प्रशासन से मरीज यह पूछते हैं कि मशीन कब ठीक होगी तो किसी के पास जवाब नहीं होता और सीधे एसएमओ के कमरे की तरफ इशारा कर देते हैं।
प्रतिदिन 300 से 350 ओपीडी
दादरी प्रदेश का सबसे बड़ा उपमंडल होने के कारण सिविल अस्पताल में काफी संख्या में उपचार करवाने के लिए लोग आते है। इनमें ज्यादातर गर्भवती महिलाएं होती हैं। महिला रोग विशेषज्ञ इनके बच्चों का स्वास्थ्य जांचने के लिए अल्ट्रासाउंड करवाती है। मशीन खराब होने के कारण महिलाओं को निजी अस्पतालों में जाकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है।