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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से फरीदाबाद के किसानों को मिली राहत
भास्कर न्यूज - फरीदाबाद
सुप्रीम कोर्ट के बिना मुआवजे अधिग्रहण रद्द करने के फैसले से नहरपार किसानों ने राहत की सांस ली है। मंगलवार को आए इस फैसले के बाद नहरपार के कई गांवों के किसानों ने एक बैठक कर सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की सराहना की। इस फैसले से नहरपार के काफी किसानों को फायदा होगा।
नहरपार ग्रेटर फरीदाबाद किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शिवदत्त वशिष्ठ ने कहा कि आज तक रा\\\'य सरकार धड़ल्ले से पुराने कानून के तहत किसानों की जमीन को जबरदस्ती अधिग्रहण करने में लगी हुई है। किसान अपनी जमीन को बचाने के लिए सरकार से संघर्ष करते चले आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में जमीन अधिग्रहण के एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि सरकार जमीन अधिग्रहण के पांच साल तक किसानों को मुआवजा नहीं दे पाती है या फिर मुआवजे की रकम कोर्ट में जमा नहीं की जाती तो वह अधिग्रहण रद्द किया जा सकता है। सरकारी खजाने में किसानों के नाम से जमा पैसा बचने का आधार नहीं माना जाता सकता। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में संबंधित क्षेत्र की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। इस फैसले से किसानो में एक नई उम्मीद जगी है। वशिष्ठ के अनुसार आज तक किसानों के बगैर मर्जी के आए दिन अवार्ड घोषित किए जाते रहे हैं क्योंकि सरकार करोड़ों रुपए की जमीन को अधिग्रहित करके प्राइवेट बिल्डरों को देकर मोटा मुनाफा कमाने में लगी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने नए कानून की पहली व्याख्या करते हुए भू-मालिकों के हक में फैसला सुनाया है। इस फैसले का असर भूमि अधिग्रहण के पुराने ढर्रे पर चल रहे रा\\\'यों पर पड़ेगा और जल्द ही फैसले की कॉपी लेकर किसान अपने अधिकारों के लिए आगे की रणनीति बनाएंगे।