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मनीओ की बहादुरी ने नम कीं उप सेनाध्यक्ष की आंखें

8 वर्ष पहले
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विनीता पाण्डेय - नई दिल्ली
राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार विजेता ब\\\'चों से हाथ मिलाते समय गुरुवार को जब उप सेना अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग की नजर एक चेहरे पर टिकीं तो वे कुछ चौंक गए। ये चेहरा था नगालैंड के मास्टर मनीओ चचई का। चचई की तस्वीर उसके दादा हाथ में लिए खड़े थे और उनकी आंखें भी नम थीं। दरअसल चचई अपने दो डूबते हुए दोस्तों की जिंदगी को बचाने की कोशिश में अपनी जान गंवा बैठा था। इस साहसिक कारनामे के लिए इस साल गणतंत्र दिवस पर उसे मरणोपरांत राष्ट्रीय बहादुरी पदक से सम्मानित किया जा रहा है. दो साल पहले नगालैंड में अपनी पोस्टिंग के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग इस मेधावी बालक से मिले थे, उस समय वह एनसीसी का कैडेट था और फौज में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था। नगालैंड में रहते हुए वे उसके परिवार को भी अ\\\'छी तरह जानने लगे थे।
‘भास्कर’ से खास बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग ने कहा, ‘आज चचई की तस्वीर इस रूप में देखकर मेरी आंखें नम हो गयीं। मैंने सोचा था वो एक दिन फौज में आकर देश का नाम रोशन करेगा वाकई इस ब\\\'चे ने अपनी बहादुरी साबित कर दी।’
25 बहादुर ब\\\'चों को शुक्रवार को प्रधानमंत्री सम्मानित करेंगे। इससे पहले आज ये ब\\\'चे उप सेना अध्यक्ष से मिले। मजे की बात यह है कि इनमें से \\\'यादातर ब\\\'चे सेना से जुडऩा चाहते हैं। महाराष्ट्र की नौ वर्षीय तनवी नंदकुमार ओव्हल बड़ी होकर वायुसेना में पायलट चाहती है। तन्वी ने छोटी बहन को गहरे पानी की टंकी से निकालकर उसकी जान बचाई थी। 14वर्षीय अभिषेक एक्का ((छत्तीसगढ़)) भी नौसेना में जाने के इ\\\'छुक हैं। उन्होंने कुएं में डूब रहे एक ब\\\'चे को बचाया था। दिल्ली के 14 वर्षीय सागर कश्यप बड़े होकर तैराक बनना चाहते हैं और देश के लिए ओलिंपिक मैडल जीतना चाहते हैं। इसके साथ ही वे बॉर्डर पर जाकर देश की रक्षा करना चाहते हैं।