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जांच के नाम पर लंबे अर्से तक आरोपी को जेल में रखना सही नहीं: सुप्रीम कोर्ट
कर्नाटक के पूर्व मंत्री गली जनार्दन रेड्डी की जमानत याचिका पर सुनवाई’
राजीव सिन्हा - नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जांच के नाम पर महीनों या सालों तक किसी व्यक्ति को सलाखों के पीछे रखना उचित नहीं है। प्रजातांत्रिक देश में ऐसा करना ठीक नहीं हैं। अवैध खनन के मामले में महीनों से जेल में बंद कर्नाटक के पूर्व मंत्री गली जनार्दन रेड्डी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की हैं। जांच का हवाला देते हुए देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई रेड्डी की जमानत याचिका का विरोध कर रही है। रेड्डी 27 महीनों से जेल में बंद हैं। न्यायमूर्ति एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने जांच में हो रही देरी पर सीबीआई को फटकारते हुए कहा, ‘आखिरकार आप जांच के नाम पर किसी व्यक्ति को कितने दिन जेल के भीतर रखेंगे। प्रजातंत्र में यह ठीक नहीं हैं। आखिरकार उस व्यक् तिका भी कोई अधिकार हैं। देश की सर्वो\\\'च अदालत ऐसी इजाजत नहीं दे सकती कि ट्रायल के नाम पर आप लोगों को अनिश्चितकाल के लिए सलाखों के पीछे रखें।’ हालांकि पीठ ने फिलहाल रेड्डी को जमानत देने से इनकार किया है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई को जांच में काम जल्द पूरा करने का निर्देश देते हुए 28 मार्च तक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।
रिपोर्ट देखने के बाद जमानत याचिका पर विचार किया जाएगा।
रेड्डी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल सवा दो साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं। चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी हैं। सारे दस्तावेज जब्त किए जा चुके हैं। अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल करने के नाम पर सीबीआई रेड्डी की जमानत याचिका का विरोध कर रही हैं। फिलहाल मुकदमा चार्ज फ्रेम के चरण में हैं और यह लंबे समय से अटका है। ऐसे में रेड्डी को जमानत दी जानी चाहिए। वहीं सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल पारस कुहाड़ ने कहा कि जांच का काम जारी है। इस पर पीठ ने सीबीआई को जल्द से जल्द जांच का काम पूरा करने का निर्देश देते हुए 28 मार्च तक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।